लखनऊ में EMI वसूली का खौफनाक आरोप: किस्त नहीं चुकाई तो युवक को बंधक बनाने और जबरन खून निकलवाने का दावा

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  • 21,500 रुपये का मोबाइल, 2,799 रुपये मासिक किस्त; परिवार का आरोप—युवक को पांच दिन तक बंधक रखकर कराई मजदूरी, भाई से ऑनलाइन पैसे भी मंगवाए

लखनऊ, 15 सितंबर। राजधानी लखनऊ के निगोहां क्षेत्र से मोबाइल फोन की EMI वसूली को लेकर बेहद गंभीर मामला सामने आया है। राजारामखेड़ा गांव निवासी नेवल के परिवार का आरोप है कि मोबाइल की किस्त के विवाद में कुछ लोगों ने युवक को घर से अपने साथ ले जाकर बंधक बना लिया। परिवार का दावा है कि युवक को एक ब्लड बैंक ले जाकर जबरन एक यूनिट खून निकलवाया गया और इसके बाद सदर इलाके के एक मकान में कई दिनों तक रखा गया तथा उससे मजदूरी कराई गई।

21,500 रुपये का मोबाइल, 2,799 रुपये की किस्त

परिवार के मुताबिक नेवल ने करीब एक साल पहले निगोहां की गीता मोबाइल शॉप से जीरो डाउन पेमेंट पर करीब 21,500 रुपये का सैमसंग मोबाइल खरीदा था। इसकी 12 महीने की मासिक किस्त 2,799 रुपये बताई गई है।

परिजनों का आरोप है कि पहली किस्त बकाया होने पर दुकान से जुड़े कुछ लोग घर पहुंचे और मोबाइल वापस ले गए। इसके बाद करीब एक साल बाद फिर युवक को कथित तौर पर निशाना बनाया गया।

8 सितंबर को घर से ले जाने का आरोप

परिवार के अनुसार 8 सितंबर को दो लोग गांव पहुंचे और नेवल को अपने साथ ले गए। आरोप है कि उसे एक ब्लड बैंक ले जाया गया, जहां उसका एक यूनिट रक्त निकाला गया। इसके बाद उसे सदर क्षेत्र के एक मकान में कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया और उससे जबरन काम कराया गया।

भाई से पहले 2,799, फिर 12,500 रुपये की मांग

पीड़ित परिवार का आरोप है कि बंधक बनाए जाने के दौरान नेवल के जरिए उसके बड़े भाई राजकुमार से संपर्क किया गया। मोबाइल की किस्त के नाम पर 2,799 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराने का आरोप है। इसके बाद परिवार से करीब 12,000 से 12,500 रुपये अतिरिक्त मांगे जाने की बात सामने आई है।

परिवार का यह भी आरोप है कि रकम नहीं देने पर युवक को जान से मारकर गोमती नदी में फेंकने की धमकी दी गई।

पांच दिन बाद थाने पहुंचा युवक

परिजनों के मुताबिक, मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने पुलिस से मदद मांगी। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद कथित तौर पर पांचवें दिन नेवल को रैपिडो/कैब के जरिए थाने भेजा गया। परिवार का दावा है कि जब वह थाने पहुंचा तो उसकी हालत बदहवास थी।

पुलिस पर भी लापरवाही के आरोप

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि शुरुआती शिकायत के बाद तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद परिवार डीसीपी दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक के पास पहुंचा। डीसीपी के निर्देश के बाद मामले में मुकदमा दर्ज किया गया और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को लगाया गया है। साथ ही शुरुआती स्तर पर पुलिस की कथित लापरवाही की जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।

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दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा, गिरफ्तारी के प्रयास

रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने एक नामजद और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण, बंधक बनाने और मारपीट समेत गंभीर आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पूरी सच्चाई पुलिस जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

सबसे बड़ा सवाल: EMI वसूली की यह कैसी ‘रिकवरी’?

मोबाइल की कुछ हजार रुपये की किस्त के विवाद में किसी व्यक्ति को कथित तौर पर बंधक बनाना, धमकाना या जबरन खून निकलवाना बेहद गंभीर आरोप हैं। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सामान्य EMI वसूली नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक मामला होगा। फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

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