₹65 हजार की ऑनलाइन घूस का आरोप, महिला आरक्षी मोहिनी रानी निलंबित; हरदोई पुलिस की आंकिक शाखा पर उठे गंभीर सवाल

₹65 हजार की ऑनलाइन घूस का आरोप, महिला आरक्षी मोहिनी रानी निलंबित; हरदोई पुलिस की आंकिक शाखा पर उठे गंभीर सवाल
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हरदोई। पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बीच हरदोई से ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की आंकिक शाखा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला ₹65,010 के कथित ऑनलाइन रिश्वत लेनदेन से जुड़ा है। आरोप सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने आंकिक शाखा में संबद्ध महिला आरक्षी मोहिनी रानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

पुलिस के मुताबिक, आंकिक शाखा में रहे उर्दू अनुवादक शकील अहमद पर आरोप है कि उन्होंने 31 जनवरी 2024 को सेवानिवृत्त हुए उपनिरीक्षक मोहन लाल से वेतन संशोधन के बाद होने वाली रिकवरी रोकने का लालच देकर कथित तौर पर उत्कोच की मांग की।

मामले में सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक की ओर से उपलब्ध कराए गए स्क्रीनशॉट और बैंक ट्रांजैक्शन में ₹65,010 की रकम ऑनलाइन माध्यम से आंकिक शाखा में संबद्ध महिला आरक्षी मोहिनी रानी के PhonePe खाते में पहुंचने का आरोप सामने आया है।

यानी सवाल सिर्फ रकम के लेनदेन का नहीं, बल्कि यह भी है कि सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी से कथित तौर पर किस काम के बदले पैसे मांगे गए और पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे?

मामला सामने आते ही पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई करते हुए महिला आरक्षी मोहिनी रानी को निलंबित कर दिया। अब विभागीय जांच में यह साफ होना बाकी है कि कथित ₹65,010 का लेनदेन किस परिस्थितियों में हुआ, इसकी जानकारी किस-किस अधिकारी या कर्मचारी को थी और क्या इस पूरे प्रकरण में किसी अन्य की भूमिका भी सामने आती है।

हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी, लेकिन पुलिस विभाग के भीतर कथित रिश्वत के ऑनलाइन लेनदेन का आरोप अपने आप में गंभीर है। खासकर तब, जब मामला वेतन और सेवानिवृत्ति से जुड़े सरकारी भुगतान जैसे संवेदनशील विषय से जुड़ा हो।

हरदोई पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि अधिकारी और कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति किसी भी तरह की उदासीनता या शिथिलता न बरतें। अनियमितता सामने आने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

अब असली परीक्षा विभागीय जांच की है—क्या कार्रवाई सिर्फ निलंबन तक सीमित रहेगी या कथित ऑनलाइन लेनदेन की पूरी कड़ी सामने लाकर जिम्मेदार हर व्यक्ति की जवाबदेही तय की जाएगी? यही सवाल इस पूरे मामले में सबसे अहम है।

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