लखनऊ। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के टोल प्लाजाओं पर अधिकृत सिस्टम के समानांतर कथित तौर पर दूसरा और गुप्त सॉफ्टवेयर चलाकर टोल लेनदेन में हेराफेरी किए जाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के लखनऊ जोनल कार्यालय ने उत्तर प्रदेश समेत सात राज्यों में एक साथ 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
जांच एजेंसी की कार्रवाई उत्तर प्रदेश के अलावा वाराणसी, गुरुग्राम, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश और कोलकाता में हुई। तलाशी के दौरान मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच में महत्वपूर्ण सुराग मिलने का दावा किया गया है।
टोल प्लाजा के विशेष पोर्टल और पासवर्ड मिले
ED के अनुसार, जांच के दौरान कई टोल प्लाजा से जुड़े विशेष पोर्टल, यूजर आईडी और पासवर्ड बरामद हुए हैं। एजेंसी को टोल लेनदेन से संबंधित डेटा के साथ-साथ आरोपियों के बीच हुई बातचीत के रिकॉर्ड भी मिले हैं। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आधिकारिक खातों से बाहर रखी गई रकम कितनी थी और कथित अनधिकृत टोल वसूली से किस-किस व्यक्ति या संस्था को आर्थिक लाभ पहुंचा।
सॉफ्टवेयर डेवलपर समेत कई लोगों के ठिकानों पर तलाशी
वाराणसी में ED ने सॉफ्टवेयर डेवलपर आलोक कुमार सिंह के फ्लैट की तलाशी ली। वहीं गुरुग्राम में शिवा बिल्डटेक के निदेशक अशोक जैन के मकान और कंपनी के दूसरे निदेशक रोहित गुप्ता से जुड़े ठिकाने पर भी कार्रवाई की गई। मध्य प्रदेश में पूर्व विधायक संजय शर्मा से जुड़ी कंपनी भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
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अधिकृत सिस्टम के साथ चल रही थी अनधिकृत व्यवस्था
ED की जांच में कुछ टोल प्लाजाओं पर अधिकृत सॉफ्टवेयर के साथ अनधिकृत व्यवस्था संचालित किए जाने के संकेत मिलने की बात सामने आई है। एजेंसी ने Mobdata और Any नाम के सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के संकेत मिलने का भी दावा किया है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि इस समानांतर व्यवस्था के जरिए टोल संग्रह और उसके वास्तविक वित्तीय रिकॉर्ड में कितना अंतर पैदा किया गया।
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जनवरी 2025 में STF ने खोला था मामला
इस मामले की शुरुआती जांच उत्तर प्रदेश एसटीएफ की कार्रवाई से सामने आई थी। 22 जनवरी 2025 को STF ने अतरैला टोल प्लाजा पर कार्रवाई की थी। इसके बाद हुई जांच में शुरुआती तौर पर करीब 42 टोल प्लाजाओं पर कथित तौर पर इस तरह के सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
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अब ED ने मामले में मनी ट्रेल और कथित अवैध कमाई की पड़ताल तेज कर दी है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि समानांतर सॉफ्टवेयर व्यवस्था किस स्तर तक फैली थी, इससे कितनी रकम का लेनदेन हुआ और पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।





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