- जालौन में सरकारी वाहन आवंटन को लेकर राही ने उठाए सवाल, निजी नंबर की गाड़ी उपलब्ध कराने और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप
- आउटसोर्स ड्राइवरों के कम वेतन और भुगतान में देरी पर भी चिंता, पूरे प्रदेश की आउटसोर्सिंग व्यवस्था की जांच की मांग
जालौन में सरकारी वाहन आवंटन को लेकर परिवहन और श्रम विभाग के आयुक्तों को लिखा पत्र, निजी नंबर की गाड़ी और ड्राइवरों के कम भुगतान पर उठाए सवाल
लखनऊ/जालौन। भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर रहने वाले आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस बार उनके निशाने पर GeM पोर्टल के जरिए होने वाली आउटसोर्सिंग और परिवहन विभाग से जुड़ी वाहन व्यवस्था है। जालौन में संयुक्त मजिस्ट्रेट (SDM न्यायिक, उरई) के पद पर तैनात राही ने सरकारी वाहन और चालक की आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर परिवहन और श्रम विभाग के आयुक्तों को पत्र भेजकर जांच की मांग की है।
राही ने आरोप लगाया है कि GeM पोर्टल के जरिए टेंडर होने के बावजूद सरकारी कार्यालयों में पसंदीदा वेंडर को लाभ पहुंचाने और नियमों को दरकिनार करने का खेल चल सकता है। उनके मुताबिक, उन्हें मैनपुरी की एजेंसी ‘हनी इंटरप्राइजेज’ के माध्यम से जो बोलेरो उपलब्ध कराई गई, वह निजी नंबर की गाड़ी थी। उन्होंने आपत्ति जताते हुए इसे बदलने के निर्देश दिए, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद एजेंसी ने दोबारा वही वाहन भेज दिया।
‘निजी गाड़ी सरकारी काम में कैसे?’
आईएएस अधिकारी ने अपने पत्र में वाहन की नंबर प्लेट और उसके व्यावसायिक उपयोग को लेकर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि सरकारी कार्य के लिए निर्धारित शर्तों के अनुरूप कामर्शियल वाहन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। निजी नंबर के वाहन का सरकारी कार्य में इस्तेमाल नियमों और टेंडर की शर्तों के अनुपालन पर सवाल खड़ा करता है।
टेंडर व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल
रिंकू सिंह राही ने पत्र में आरोप लगाया कि कुछ मामलों में पसंदीदा वेंडर को टेंडर दिलाने के लिए ऐसी प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें नाममात्र की दरों के जरिए कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। इसके बाद सेवा की गुणवत्ता और नियमों के अनुपालन पर पर्याप्त निगरानी नहीं होती।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग के नाम पर कामर्शियल वाहनों की जगह निजी वाहनों का इस्तेमाल कराया जाता है और इसके जरिए कथित तौर पर कमीशन का खेल चलता है।
ड्राइवरों के वेतन पर भी सवाल
राही ने आउटसोर्सिंग के तहत तैनात वाहन चालकों के भुगतान को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। पत्र के मुताबिक, चालक को महज 6,000 रुपये प्रतिमाह दिए जाने का आरोप है। साथ ही भुगतान कई-कई महीनों तक लंबित रहने की बात भी कही गई है।
राही का तर्क है कि यदि किसी सरकारी अधिकारी के साथ काम करने वाले चालक को बेहद कम वेतन मिले और वह भी समय पर नहीं मिले, तो ऐसी व्यवस्था भ्रष्टाचार और अवैध वसूली जैसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा दे सकती है।
X पर लिखा- ‘जहां देखो वहीं भ्रष्टाचार’
आईएएस अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कहते हुए संकेत दिया कि यदि वह व्यवस्था से भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकते तो कम से कम उसे उजागर कर ऑन द रिकॉर्ड जरूर लाएंगे।
रिंकू सिंह राही का भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष नया नहीं है। पीसीएस अधिकारी रहते उन्होंने समाज कल्याण विभाग में कथित घोटाले को उजागर किया था। इसी दौरान उन पर हमला हुआ और उन्हें गोली भी लगी थी। बाद में वह आईएएस बने।
पूरे प्रदेश की आउटसोर्सिंग व्यवस्था की जांच की मांग
राही ने पूरे मामले की व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस प्रकरण को एक ‘केस स्टडी’ के रूप में लेते हुए प्रदेशभर में सरकारी विभागों में चल रही आउटसोर्सिंग व्यवस्था का परीक्षण कराया जाए।
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अब देखना यह होगा कि राही द्वारा उठाए गए सवालों पर परिवहन और श्रम विभाग क्या कार्रवाई करते हैं और क्या इस मामले में टेंडर प्रक्रिया, वाहन की वैधता, चालक के भुगतान तथा एजेंसी की भूमिका की औपचारिक जांच होती है।





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