- एक साल से अधिक देरी पर न्यायिक आदेश जरूरी; जन्म और मृत्यु के दावों का सत्यापन भी होगा अनिवार्य

नई दिल्ली। देश में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की व्यवस्था को अधिक सख्त, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। लोकसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है। यह विधेयक 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और 31 जुलाई को सदन की मंजूरी मिल गई।https://www.instagram.com/reel/DbdxGNBBlQi/?igsh=MTA2cGxxdHRiMXJjZg==
विधेयक के जरिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। नए प्रावधानों का उद्देश्य जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय बनाना, फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाना और देशभर में पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल एवं व्यवस्थित करना है।
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एक साल से अधिक देरी पर न्यायिक प्रक्रिया
नए संशोधन के तहत जन्म या मृत्यु की घटना के एक वर्ष बाद पंजीकरण कराने की प्रक्रिया अधिक सख्त हो सकती है। ऐसे मामलों में केवल सामान्य प्रशासनिक अनुमति पर्याप्त नहीं होगी और पंजीकरण के लिए सक्षम न्यायिक प्राधिकारी के आदेश की आवश्यकता पड़ सकती है। इससे लंबे समय तक पंजीकरण न कराने वाले लोगों को दस्तावेजी प्रक्रिया के साथ न्यायालय अथवा न्यायिक प्राधिकारी के समक्ष भी जाना पड़ सकता है।
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हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि विधेयक के लोकसभा से पारित होने के बाद भी इसके प्रावधान तत्काल लागू नहीं होंगे। इसे आगे संसद की अन्य संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरना होगा और कानून बनने के बाद अधिसूचना एवं लागू होने की तारीख तय की जाएगी।
दावों का सत्यापन होगा अनिवार्य
संशोधन विधेयक में जन्म और मृत्यु से संबंधित दावों के सत्यापन को अनिवार्य बनाने का प्रावधान भी शामिल है। इसका उद्देश्य गलत जानकारी, फर्जी पंजीकरण और दस्तावेजों के दुरुपयोग पर रोक लगाना है। पंजीकरण के दौरान उपलब्ध कराई गई जानकारी और दस्तावेजों की जांच अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।
समय पर पंजीकरण कराना जरूरी
जन्म या मृत्यु की घटना के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण कराना पहले से ही जरूरी है। सामान्य तौर पर घटना की सूचना 21 दिनों के भीतर संबंधित स्थानीय रजिस्ट्रार को दी जानी चाहिए। समय पर पंजीकरण कराने से बाद में अतिरिक्त दस्तावेज, विलंब शुल्क और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से बचा जा सकता है।
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नागरिकों पर क्या होगा असर?
नए प्रावधान लागू होने के बाद जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़े रिकॉर्ड अधिक डिजिटल और सत्यापित हो सकते हैं। जन्म प्रमाणपत्र का उपयोग स्कूल में प्रवेश, सरकारी सेवाओं, पासपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में होता है, जबकि मृत्यु प्रमाणपत्र उत्तराधिकार, बीमा, पेंशन और अन्य कानूनी मामलों में आवश्यक दस्तावेज माना जाता है।
सरकार का उद्देश्य रिकॉर्ड को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है, लेकिन लंबे समय तक जन्म या मृत्यु का पंजीकरण न कराने वाले लोगों के लिए प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकती है। ऐसे में नागरिकों को जन्म या मृत्यु की घटना के बाद तय समय सीमा के भीतर पंजीकरण कराने की सलाह दी जा रही है।





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