- किसानों को पराली जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके अपनाने की अपील, मिट्टी की सेहत और पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर
बठिंडा, 24 अक्टूबर। (सुरेश रहेजा, प्रवीण कुमार, साहिल रहेजा)
पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से नथाना ब्लॉक के भैणी गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत एक दिवसीय पराली प्रबंधन प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य किसानों को धान की पराली जलाने के बजाय खेत में ही उसके वैज्ञानिक प्रबंधन, इसके लाभ और पर्यावरण अनुकूल खेती के तरीकों के प्रति जागरूक करना था।
शिविर में एक्सटेंशन एजुकेशन के प्रोफेसर डॉ. गुरमीत सिंह ने किसानों के साथ विचार साझा करते हुए कहा कि पराली प्रबंधन वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। किसानों को पराली जलाने से बचते हुए वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना चाहिए, जिससे पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता भी बनाए रखी जा सके।
पशुपालन में पराली के उपयोग और सरकारी योजनाओं की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान एनिमल साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गुरलाल सिंह ने किसानों को पराली के उचित उपयोग और पशुपालन में इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पराली के बेहतर प्रबंधन तथा उपलब्ध कृषि संसाधनों के सही इस्तेमाल के महत्व पर प्रकाश डाला।
वहीं, कृषि विभाग के एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर जगदीप सिंह ने किसानों के हित में विभाग की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और पराली प्रबंधन से संबंधित सुविधाओं की जानकारी दी।
शिविर के माध्यम से किसानों को संदेश दिया गया कि पराली का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने से मिट्टी की सेहत बनाए रखने, वायु प्रदूषण कम करने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है। किसानों से अपील की गई कि वे पराली जलाने के बजाय पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाएं और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में अपना योगदान दें।



