- कृषि विभाग ने विभिन्न गांवों में लगाए प्रशिक्षण शिविर, सब्सिडी पर मिलने वाली मशीनों के बारे में बताया
- खेतों में पराली बचाने की अपील, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक खाद का उपयोग घटाने पर जोर
बठिंडा, 16 अक्टूबर। धान की पराली जलाने पर रोक लगाने और उसके उचित प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से जिलेभर में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को विभिन्न गांवों और क्षेत्रों में किसान प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए। शिविरों में किसानों को पराली प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों, सरकार की ओर से सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाने वाली मशीनों तथा कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई।
डिप्टी कमिश्नर बठिंडा राजेश धीमान के निर्देशों और मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. हरप्रीतपाल कौर के मार्गदर्शन में आयोजित इन शिविरों का उद्देश्य किसानों को पराली के उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक करना और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रोत्साहित करना है।
कई गांवों में आयोजित हुए प्रशिक्षण शिविर
कृषि विभाग की ओर से जस्सी बागवाली, कोट गुरु, बंगी रुलदू सर्कल रामा, बांडी, गोनियाना खुर्द, नगर पंचायत मलूका, बीबीवाला, चौके और बुलाधेवाला सहित विभिन्न स्थानों पर किसान प्रशिक्षण शिविर लगाए गए। इन शिविरों में किसानों को धान की पराली के प्रबंधन के साथ गेहूं एवं सरसों की खेती, किसान आईडी और विभाग की ओर से संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।
किसानों को पराली प्रबंधन के लिए इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनों और तकनीकों के बारे में भी बताया गया, ताकि वे उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके फसल अवशेषों का उचित निस्तारण कर सकें।
मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर जोर
शिविरों के दौरान किसानों से अपील की गई कि वे धान की पराली को खेतों में अधिक से अधिक संरक्षित करें और उसे जलाने के बजाय उचित प्रबंधन तकनीकों को अपनाएं। इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण प्रदूषण कम करने और रासायनिक खादों पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा किसानों को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाने वाले सरसों और चने के बीजों के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि किसान इन योजनाओं का लाभ उठाकर खेती को अधिक लाभकारी बना सकें।
अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों ने लिया हिस्सा
इन प्रशिक्षण शिविरों में कृषि विभाग के विभिन्न ब्लॉकों के अधिकारियों, प्रगतिशील किसानों और गांवों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। विभाग की ओर से किसानों को पराली प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों को अपनाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय सहयोग देने के लिए प्रेरित किया गया।
रिपोर्ट: सुरेश रहेजा, प्रवीण कुमार एवं साहिल रहेजा, बठिंडा
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