कम जगह और कम खर्च में मशरूम उत्पादन से बेहतर कमाई, किसानों को दी गई ट्रेनिंग

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  1. कृषि विज्ञान केंद्र बठिंडा में ‘आरिया प्रोजेक्ट’ के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम, युवाओं ने दिखाई रुचि

बठिंडा, 06 अक्टूबर। खेती में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और युवाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, बठिंडा की ओर से ‘आरिया प्रोजेक्ट’ के तहत 28 सितंबर से 5 अक्टूबर तक मशरूम उत्पादन पर विशेष प्रशिक्षण कोर्स आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं और किसानों ने मशरूम की खेती को लेकर खासा उत्साह दिखाया।

कृषि विज्ञान केंद्र बठिंडा के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. गुरदीप सिंह सिद्धू ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि मशरूम उत्पादन पारंपरिक खेती के मुकाबले युवाओं के लिए रोजगार का बेहतर विकल्प बन सकता है। कम जगह, कम पूंजी और कम समय में मशरूम उत्पादन से अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है। उन्होंने युवाओं से प्रशिक्षण लेकर मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार के रूप में अपनाने की अपील की।

बटन से मिल्की मशरूम तक वैज्ञानिक खेती की दी जानकारी

केवीके मानसा के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं एक्सपर्ट साइंटिस्ट डॉ. तेजपाल सिंह सरां ने बटन, स्ट्रॉ, ढींगरी और मिल्की मशरूम की खेती से संबंधित तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने तापमान, नमी, साफ-सफाई और गुणवत्तापूर्ण सामग्री के चयन के महत्व को समझाया।

केवीके श्री मुक्तसर साहिब के डॉ. सुखजिंदर सिंह ने मशरूम को पौष्टिक खाद्य पदार्थ बताते हुए कहा कि इसमें प्रोटीन, विटामिन और मिनरल पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। यही वजह है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन कर युवा छोटे स्तर से शुरुआत करते हुए इसे व्यावसायिक स्तर तक ले जा सकते हैं।

डॉ. गुरमीत सिंह ढिल्लों ने मशरूम की पैकेजिंग और मार्केटिंग के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान कम्पोस्ट तैयार करने, मशरूम बैग भरने, रोग प्रबंधन, कटाई, भंडारण और बाजार में बिक्री से जुड़ी तकनीकों की भी जानकारी दी गई।

प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर भी हुआ प्रशिक्षण

असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रमनदीप कौर ने मशरूम उत्पादन के बाद प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन की तकनीक समझाई। उन्होंने सफाई, ग्रेडिंग, पैकिंग, सुखाने और संरक्षण के जरिए मशरूम की शेल्फ लाइफ बढ़ाने तथा बेहतर बाजार मूल्य हासिल करने के तरीकों की जानकारी दी।

डॉ. अनुरीत कौर चांदी ने ऑनलाइन माध्यम से मशरूम को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों, उनकी पहचान और बचाव के उपाय बताए। वहीं पीएयू की एक्सपर्ट डॉ. अन्ना गोयल ने ढींगरी मशरूम की सफल खेती, इससे तैयार होने वाले उत्पादों और मार्केटिंग की जानकारी साझा की।

प्रशिक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने युवाओं को मशरूम उत्पादन से होने वाली आय की संभावनाओं के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से मशरूम की खेती अपनाकर युवा इसे रोजगार का मजबूत माध्यम बना सकते हैं और देश में ही स्वरोजगार स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

कोर्स के दौरान प्रतिभागियों को स्वयं कम्पोस्ट तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षणार्थियों ने विशेषज्ञों से अपने सवाल पूछे, जिनका संतोषजनक जवाब दिया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि प्रशिक्षण से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे भविष्य में मशरूम उत्पादन के जरिए अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए उत्साहित हैं।

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