- SIR से पहले और बाद की मतदाता सूची का होगा मिलान, बीएलओ घर-घर जाकर भरवाएंगे फॉर्म-6
- पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं, नवविवाहित महिलाओं और वंचित पात्र लोगों पर रहेगा विशेष फोकस
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची में छूटे पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए एक महीने का विशेष अभियान चलाया जाएगा। अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर ऐसे पात्र लोगों की पहचान करेंगे, जिनके नाम किसी कारणवश मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके हैं।
इस अभियान में SIR से पहले और उसके बाद तैयार मतदाता सूचियों का मिलान किया जाएगा। इसके आधार पर छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान कर उन्हें मतदाता सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं पर भी फोकस
अभियान के दौरान 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके और पहली बार मतदान के लिए पात्र युवाओं के नाम भी जोड़े जाएंगे। बीएलओ ऐसे पात्र नागरिकों से फॉर्म-6 भरवाएंगे और नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में सहायता करेंगे।
इसके साथ ही शादी के बाद दूसरे क्षेत्र में जाकर रहने वाली नवविवाहित महिलाओं को भी अभियान में शामिल किया जाएगा। जिन महिलाओं का नाम नए निवास क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, उन्हें फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जुड़वाने की सुविधा दी जाएगी।
बेघर और वंचित पात्र नागरिकों की भी होगी पहचान
विशेष अभियान का दायरा केवल नियमित आवासीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा। आश्रय स्थलों, श्रमिक कॉलोनियों, बेघर नागरिकों और अन्य वंचित लेकिन पात्र लोगों की भी पहचान की जाएगी, ताकि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।
प्रत्येक बीएलओ को सप्ताह में कम से कम 25 लोगों से संपर्क करने का लक्ष्य दिया गया है। मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे, जहां पात्र नागरिकों को फॉर्म-6 उपलब्ध कराने के साथ नाम जोड़ने की प्रक्रिया में सहायता दी जाएगी।
राजनीतिक दलों के बूथ एजेंटों से साझा होंगे फॉर्म
अभियान के दौरान प्राप्त भरे हुए फॉर्म-6 को राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के साथ भी साझा किया जाएगा। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है।
पूरे अभियान की निगरानी मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा की जाएगी। अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि SIR के बाद कोई पात्र नागरिक केवल प्रक्रिया के दौरान नाम छूट जाने के कारण मताधिकार से वंचित न रह जाए।


