- ₹2,400 करोड़ की परियोजना से बढ़ी रेल क्षमता, पुराने राजेंद्र पुल के साथ अब तीन रेल लाइनें
पटना/मोकामा। बिहार के मोकामा में गंगा नदी पर निर्मित नया डबल-लाइन रेल पुल ट्रेनों के परिचालन के लिए चालू हो गया है। करीब ₹2,400 करोड़ की लागत से तैयार यह पुल मौजूदा राजेंद्र पुल के समानांतर बनाया गया है। नई दो रेल लाइनों के जुड़ने के बाद इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर अब कुल तीन रेल लाइनें उपलब्ध हो गई हैं।
रेलवे के अनुसार, नई व्यवस्था से इस रेलखंड की ट्रैफिक क्षमता करीब 2.5 गुना तक बढ़ने की संभावना है। नए पुल पर पहली ट्रेन के रूप में महानंदा एक्सप्रेस का परिचालन शुरू हुआ। रेल संरक्षा आयुक्त की मंजूरी और 3-4 अक्टूबर को हुए निरीक्षण के बाद पुल को परिचालन के लिए खोला गया।
करीब 15.5 किलोमीटर लंबी पूरी परियोजना में 1.9 किलोमीटर लंबा मुख्य गंगा रेल पुल, 3.6 किलोमीटर रेल वायाडक्ट और अन्य संबंधित संरचनाएं शामिल हैं। इससे इस व्यस्त रेल मार्ग पर ट्रेनों के संचालन को अतिरिक्त क्षमता और अधिक लचीलापन मिलेगा।
उत्तर-दक्षिण बिहार के साथ यूपी समेत आसपास के रेल नेटवर्क को भी लाभ की उम्मीद
नए पुल के चालू होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच यात्री तथा मालगाड़ियों के परिचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग के इस महत्वपूर्ण हिस्से पर ट्रेनों के संचालन और समय-निर्धारण में भी अधिक विकल्प मिलने की उम्मीद है।
इसका लाभ बिहार के अलावा पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत से जुड़े व्यापक रेल नेटवर्क को मिल सकता है। उत्तर प्रदेश समेत आसपास के राज्यों की वे ट्रेनें भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकती हैं, जिनका परिचालन इस नेटवर्क से जुड़ा है। हालांकि, किसी विशेष यूपी ट्रेन के समय या रूट में बदलाव की पुष्टि रेलवे की आधिकारिक समय-सारिणी या आदेश के आधार पर ही की जानी चाहिए।
99.6 फीसदी ब्रॉडगेज नेटवर्क विद्युतीकृत
भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे में एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव तेजी से हो रहे विद्युतीकरण का है। PIB के अनुसार, मार्च 2026 तक रेलवे के करीब 69,873 रूट किलोमीटर ब्रॉडगेज नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा हो चुका था। इससे कुल ब्रॉडगेज नेटवर्क का लगभग 99.6 फीसदी हिस्सा विद्युतीकृत हो गया है।
विद्युतीकरण के साथ रेलवे की डीजल पर निर्भरता में भी उल्लेखनीय कमी आई है। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, डीजल की खपत 2015-16 में 293 करोड़ लीटर से घटकर 2024-25 में 108 करोड़ लीटर रह गई।
मोकामा में नई रेल क्षमता का जुड़ना और देशभर में तेजी से बढ़ता विद्युतीकरण भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे और परिचालन व्यवस्था में हो रहे बड़े बदलाव को दर्शाता है।


