- 3.81 लाख वर्गमीटर जमीन के लीजबैक में गंभीर अनियमितताओं के आरोप, लंबी विभागीय जांच के बाद शासन की बड़ी कार्रवाई
मुजफ्फरनगर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन ने मुजफ्फरनगर में अपर जिलाधिकारी प्रशासन के पद पर रह चुके वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। शासन की ओर से 28 सितंबर 2026 को बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया। हालांकि, इस कार्रवाई का संबंध मुजफ्फरनगर की उनकी तैनाती से नहीं, बल्कि नोएडा प्राधिकरण में तत्कालीन सचिव के कार्यकाल के दौरान शहदरा गांव से जुड़े जमीन लीजबैक प्रकरण से है।
3.81 लाख वर्गमीटर जमीन के लीजबैक पर उठे सवाल
विभागीय जांच में सेक्टर-140ए, 141, 142 और 143 से संबंधित करीब 3,81,527 वर्गमीटर भूमि के लीजबैक की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।
आरोपों के मुताबिक सर्वे रिपोर्ट में महत्वपूर्ण तथ्यों को कथित तौर पर छिपाया गया और गांव के बाहर के लोगों तथा निजी कंपनियों को भी लीजबैक प्रक्रिया में शामिल किया गया। जांच में भूमि की पात्रता और निर्धारित सीमा से जुड़े नियमों के उल्लंघन के आरोप भी सामने आए।
₹4,000 करोड़ का आंकड़ा जमीन के बाजार मूल्य से जुड़ा
इस मामले में सामने आने वाला करीब ₹4,000 करोड़ का आंकड़ा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उपलब्ध विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार लगभग 4,00,447 वर्गमीटर भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य करीब ₹4,000 करोड़ बताया गया था।
इसलिए इसे सीधे तौर पर ₹4,000 करोड़ की सरकारी धनराशि की हेराफेरी कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। उपलब्ध रिकॉर्ड में यह रकम जमीन के अनुमानित बाजार मूल्य से संबंधित है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के 3 सितंबर 2026 के आदेश में भी विभागीय जांच और आरोपों की पृष्ठभूमि का उल्लेख किया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार विभागीय जांच में लगाए गए चारों आरोप सिद्ध पाए गए।
2013 में शुरू हुई थी विभागीय कार्रवाई
हरीश चंद्र के खिलाफ विभागीय कार्रवाई वर्ष 2013 में शुरू हुई थी। मामला लंबी न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरता रहा। 3 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मामले में आदेश पारित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकारी को अंतिम निर्णय लेने के लिए समय दिया।
इसके बाद शासन ने 28 सितंबर 2026 को हरीश चंद्र को सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस समय वह कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे।
मुजफ्फरनगर कनेक्शन सिर्फ पूर्व तैनाती तक
हरीश चंद्र मुजफ्फरनगर में एडीएम प्रशासन के पद पर तैनात रह चुके हैं। यही वजह है कि उनकी बर्खास्तगी की खबर सामने आने के बाद मुजफ्फरनगर कनेक्शन चर्चा में आया।
हालांकि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उनकी बर्खास्तगी का आधार मुजफ्फरनगर में उनकी तैनाती से जुड़ा कोई मामला नहीं, बल्कि नोएडा प्राधिकरण में सचिव रहते हुए जमीन लीजबैक प्रक्रिया से संबंधित विभागीय आरोप हैं।
विभागीय कार्रवाई और आपराधिक दोष में अंतर
इस पूरे मामले में यह अंतर समझना जरूरी है कि विभागीय जांच में किसी अधिकारी के खिलाफ आरोप सिद्ध होना और किसी व्यक्ति का आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाना अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।
उपलब्ध विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर अन्य अधिकारियों, निजी कंपनियों अथवा जमीन से जुड़े अन्य व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक दोष सिद्ध होने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उनकी जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।
फैक्ट चेक
दावा: हरीश चंद्र को यूपी सरकार ने बर्खास्त किया।
निष्कर्ष: उपलब्ध जानकारी के अनुसार सही।
दावा: बर्खास्तगी मुजफ्फरनगर के किसी मामले में हुई।
निष्कर्ष: भ्रामक। कार्रवाई का संबंध नोएडा प्राधिक


