- सुप्रीम कोर्ट ने NSA हिरासत रद्द की, यूपी सरकार पर ₹10 लाख का कॉस्ट
नई दिल्ली/संभल, 29 सितंबर 2026।
संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज को बड़ी कानूनी राहत देते हुए उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA), 1980 के तहत जारी निवारक हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर ₹10 लाख का कॉस्ट भी लगाया है। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी निरस्त कर दिया गया, जिसमें अफरोज की NSA के तहत हिरासत को बरकरार रखा गया था।
मामला नवंबर 2024 में संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, अफरोज को जनवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में 13 अक्टूबर 2025 को उसके खिलाफ NSA के तहत हिरासत आदेश जारी किया गया था।
पुलिस हिरासत में कथित कबूलनामे पर उठा सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने अहम सवाल यह था कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे को NSA के तहत निवारक हिरासत का आधार बनाया जा सकता है या नहीं।
8 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने इसी मुद्दे पर सवाल उठाते हुए फैसला सुरक्षित रखा था। अदालत ने कथित पुलिस-कबूलनामे की प्रासंगिकता और उसके आधार पर निवारक हिरासत के लिए आवश्यक ‘subjective satisfaction’ पर सवाल उठाया था।
हाईकोर्ट के आदेश को भी किया निरस्त
मुल्ला अफरोज ने NSA के तहत अपनी हिरासत को चुनौती दी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जून 2026 में उसकी याचिका खारिज करते हुए हिरासत आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी NSA आदेश को 13 अक्टूबर 2025 का बताया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दायरा NSA के तहत निवारक हिरासत तक है। इससे संभल हिंसा से जुड़े अन्य आपराधिक मामलों या उनके संबंध में चल रही न्यायिक कार्यवाहियों का स्वतः अंत नहीं माना जाएगा।
क्या है मामला?
24 नवंबर 2024 को संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा हुई थी। मामले में कई FIR दर्ज की गई थीं। बाद की जांच में मुल्ला अफरोज का नाम सामने आया और उसके खिलाफ अलग-अलग आपराधिक मामलों में कार्रवाई हुई। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में पुलिस की ओर से उसके खिलाफ कई मामलों का उल्लेख किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल मामले की सुनवाई सितंबर 2026 में पूरी हुई थी। 8 सितंबर के आदेश में अदालत ने बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।


