SIR पर 2 हजार से ज्यादा नागरिकों का CJI को खुला पत्र, रोक और स्वतंत्र जांच की मांग

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  • 13.37 करोड़ नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं होने का दावा, अंतिम सूची से पहले दावा-आपत्ति का मौका
  • निर्वाचन आयोग के भीतर 14 बार आपत्ति दर्ज होने की रिपोर्ट, ECINet और SIR प्रक्रिया के स्वतंत्र ऑडिट की मांग

नई दिल्ली। Special Intensive Revision (SIR) को लेकर देश में राजनीतिक और कानूनी बहस के बीच 2 हजार से अधिक नागरिकों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों को खुला पत्र भेजकर SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने तथा निर्वाचन आयोग के कामकाज से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

खुले पत्र में SIR की प्रक्रिया, मतदाता फॉर्म में कथित बदलाव, चुनावी डेटा के प्रबंधन और ECINet प्रणाली से जुड़े मुद्दों को उठाया गया है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मामले पर स्वतः संज्ञान लेने तथा SIR की वैधानिकता और पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा कराने का आग्रह किया है।

13.37 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं होने का दावा

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि SIR के तीन चरणों में 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13.37 करोड़ नाम शामिल नहीं हुए। यह संख्या SIR से पहले के मतदाता आधार का करीब 14.1 प्रतिशत बताई गई है।

हालांकि, ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं होना अपने आप में अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटने के समान नहीं है। पात्र मतदाताओं को दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के जरिए अपना नाम शामिल कराने का अवसर दिया जाता है। पत्र में मांग की गई है कि तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से प्रभावित पात्र मतदाताओं के नामों की समीक्षा कर उन्हें बहाल किया जाए।

निर्वाचन आयोग के भीतर 14 बार आपत्ति की रिपोर्ट

द इंडियन एक्सप्रेस की 25 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान SIR से जुड़े फैसलों और प्रशासनिक निर्देशों पर रिकॉर्ड में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और बहाली, Form-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दों से संबंधित थीं।

रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कुछ प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए और अपनी आपत्तियां मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष भी रखीं। निर्वाचन आयोग की ओर से इन मतभेदों को संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है और कहा गया है कि अलग-अलग विचार, तकनीकी सुझाव तथा आंतरिक जांच-परख किसी संस्था की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं।

खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, अभिनेता प्रकाश राज, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य सार्वजनिक हस्तियों के शामिल होने की रिपोर्ट है।

पत्र में सुप्रीम कोर्ट से SIR पर तत्काल रोक, निर्वाचन आयोग के कामकाज की स्वतंत्र जांच तथा ECINet प्रणाली का स्वतंत्र सुरक्षा एवं कानूनी ऑडिट कराने की मांग की गई है। इन मांगों पर अंतिम निर्णय न्यायालय के समक्ष चल रही कार्यवाही और उसके आदेशों पर निर्भर करेगा।

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