जमुई पर एक्शन, समस्तीपुर-बांका-किशनगंज पर सवाल! पत्रकारों के सवालों से क्यों बचते दिखे CM सम्राट चौधरी?

जमुई पर एक्शन, समस्तीपुर-बांका-किशनगंज पर सवाल! पत्रकारों के सवालों से क्यों बचते दिखे CM सम्राट चौधरी?
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बिहार में कानून-व्यवस्था पर फिर उठे सवाल, पत्रकारों ने पूछा हर घटना पर कार्रवाई में एक जैसा मापदंड क्यों नहीं?

ब्यूरो रिपोर्ट अभिजीत कुमार झा

पटना (बिहार)। बिहार में पिछले कुछ दिनों के दौरान महिलाओं और युवतियों से बदसलूकी एवं छेड़खानी से जुड़े कई मामले सामने आने के बाद कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जमुई के बाद समस्तीपुर और किशनगंज से भी वायरल वीडियो सामने आए हैं। समस्तीपुर मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है, जबकि किशनगंज मामले में पुलिस ने पांच संदिग्धों की पहचान कर कार्रवाई शुरू की है।

जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी के पैर में गोली लगने की रिपोर्ट सामने आई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी जमुई की घटना पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी।

लेकिन अब सवाल यह है कि जब बिहार सरकार अपराध और महिला सुरक्षा के मामलों में सख्त कार्रवाई की बात करती है, तो अलग-अलग जिलों में सामने आने वाली घटनाओं पर कार्रवाई की स्थिति और समय-सीमा को लेकर जनता को स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जाती?

पत्रकारों ने CM सम्राट चौधरी से पूछे तीखे सवाल

पटना में प्रतिपक्ष मेला के शुभारंभ एवं उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों द्वारा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से जमुई सहित बिहार में सामने आ रही घटनाओं को लेकर सवाल पूछे जाने का दावा किया गया है।

पत्रकार समर राठौर सहित अन्य पत्रकारों ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री से सवाल किया कि—

“सम्राट जी, जमुई की घटना में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी के खिलाफ गोली चलाने तक की कार्रवाई की और आरोपियों की तस्वीरें भी सामने आईं। लेकिन समस्तीपुर, बांका और किशनगंज जैसी घटनाओं में कार्रवाई की स्थिति क्या है? इन मामलों पर सरकार की चुप्पी क्यों दिखाई दे रही है? इन घटनाओं पर भी कुछ स्पष्ट बोलिए।”

बताया जा रहा है कि पत्रकार लगातार मुख्यमंत्री से जवाब मांगते रहे।

लेकिन पत्रकारों के सवालों का जवाब क्या मिला?

पत्रकारों के दावे के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मौके पर इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गए।

यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है—

“मुख्यमंत्री जी, जब पत्रकार सवाल पूछते हैं तो जवाब देने से परहेज क्यों? लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना अपराध है क्या?”

पत्रकारों का काम केवल सरकार की उपलब्धियां दिखाना नहीं, बल्कि जनता के सवालों को सरकार तक पहुंचाना और सरकार से जवाब मांगना भी है।

अगर बिहार में कानून-व्यवस्था बेहतर है, तो सरकार को कठिन सवालों का भी खुलकर जवाब देना चाहिए।

अगर कहीं पुलिस कार्रवाई में देरी हुई है, तो उसकी वजह बताई जानी चाहिए।

और अगर पुलिस ने कार्रवाई की है, तो उसकी पूरी जानकारी जनता के सामने रखी जानी चाहिए।

सुशासन के दावे के बीच जनता का सवाल

बिहार में लंबे समय से “सुशासन” और कानून-व्यवस्था को सरकार की प्रमुख पहचान के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है।

अब जब जमुई के बाद समस्तीपुर और किशनगंज जैसे मामलों की खबरें सामने आ रही हैं, तो सरकार के सामने स्वाभाविक सवाल है—

क्या बिहार में हर बेटी की सुरक्षा सरकार की समान प्राथमिकता है?

क्या हर जिले में अपराध के खिलाफ एक समान और समयबद्ध कार्रवाई होगी?

क्या मुख्यमंत्री मीडिया के कठिन सवालों का खुलकर जवाब देंगे?

और सबसे बड़ा सवाल—

“जनता सवाल पूछेगी तो सरकार जवाब देगी या सवालों से बचती नजर आएगी?”

बिहार की जनता को आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई पर स्पष्ट जवाब चाहिए।

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