रजा पुस्तकालय में गूंजा हिंदी का संदेश, कार्यालयी कार्यों में सरल प्रयोग पर जोर

रजा पुस्तकालय में गूंजा हिंदी का संदेश, कार्यालयी कार्यों में सरल प्रयोग पर जोर
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विशेषज्ञों ने बताया राजभाषा हिंदी का संवैधानिक महत्व, प्रशासन और आमजन के बीच संवाद को सहज बनाने पर चर्चा

पत्राचार, टिप्पण, प्रारूपण और तकनीकी कार्यों में हिंदी को व्यवहारिक रूप से अपनाने का आह्वान

रामपुर। रिपोर्ट शाहबाज़ खां, जिला संवाददाता

रामपुर रजा पुस्तकालय के सभागार में बुधवार को ‘राजभाषा हिंदी का महत्व एवं कार्यालयी कार्य में हिंदी का प्रयोग’ विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। दोपहर 12 बजे आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ताओं ने राजभाषा हिंदी के महत्व, उसके संवैधानिक स्वरूप तथा सरकारी कार्यालयों में हिंदी के सरल एवं प्रभावी प्रयोग पर विचार रखे।

कार्यशाला की मुख्य वक्ता डॉ. किश्वर सुल्ताना, पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी, राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय रामपुर ने कहा कि भारत जैसे भाषायी और सांस्कृतिक विविधता वाले देश में हिंदी विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और राज्यों के बीच संवाद का माध्यम बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था, जिसके बाद प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि राजभाषा के रूप में हिंदी सरकारी कार्यालयों, प्रशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम नागरिकों तक सरल एवं प्रभावी ढंग से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

*कार्यालयी कार्यों में सहज हिंदी अपनाने पर जोर*

डॉ. किश्वर सुल्ताना ने कहा कि कार्यालयी कार्यों में हिंदी का प्रयोग प्रशासन और आमजन के बीच संवाद को अधिक सहज, स्पष्ट और प्रभावी बनाता है। हिंदी को केवल औपचारिकता तक सीमित रखने के बजाय दैनिक कार्यालयीन कार्यों, पत्राचार, टिप्पण, प्रारूपण और अभिलेखीय कार्यों में व्यवहारिक रूप से अपनाया जाना चाहिए।

विशेष वक्ता डॉ. अब्दुल रऊफ, पूर्व प्राचार्य, सहारा डिग्री कॉलेज केमरी ने कहा कि राजभाषा हिंदी का प्रयोग प्रशासनिक दायित्वों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकारी कार्यालयों में हिंदी का अधिकाधिक और सरल प्रयोग कार्यों में स्पष्टता, पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाने में सहायक है। उन्होंने कर्मचारियों से नियमित अभ्यास और हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

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उन्होंने कहा कि हिंदी का प्रयोग सरल, सुबोध और व्यावहारिक होना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग सरकारी कार्यों और सूचनाओं को आसानी से समझ सकें।

कार्यक्रम के समन्वयक अरुण कुमार सक्सेना, वरिष्ठ तकनीकी निदेशक ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य कार्यालयीन कार्यों में राजभाषा हिंदी के प्रभावी प्रयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि हिंदी का प्रयोग केवल राजभाषा संबंधी औपचारिकताओं तक सीमित न रहकर दैनिक पत्राचार, टिप्पण, प्रारूपण, तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों में भी सहज रूप से किया जाना चाहिए।

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उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में तकनीक भी हिंदी के प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। इस दिशा में विकसित ‘Learning Indian Language with Artificial Intelligence’ ऐप का भी उल्लेख किया गया, जो भारतीय भाषाओं के माध्यम से हिंदी सीखने में सहायता करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

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कार्यक्रम का सफल संचालन राजेश कुमार ने किया। कार्यशाला में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने विशेषज्ञों के विचार सुने और कार्यालयी कार्यों में हिंदी के अधिक प्रभावी प्रयोग का संकल्प लिया।

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