सुगंध दशमी पर जैन मंदिरों में गूंजे भक्तिमय मंत्र

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  • विशेष पूजा-अर्चना के साथ मनाया गया पर्युषण पर्व का पांचवां दिन, उत्तम संयम धर्म की महिमा बताई

अरविंद श्रीवास्तव, जिला संवाददाता

बांदा। पर्युषण पर्व के पांचवें दिन सोमवार को जैन समाज ने सुगंध दशमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया। छोटी बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर एवं जैन चौत्यालय जी में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन किए और धार्मिक विधान में भाग लिया।

संयम से आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण का मार्ग

इस अवसर पर बाल ब्रह्मचारी पंडित श्री नन्हें भइया जी ने प्रवचन देते हुए उत्तम संयम धर्म की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि संयम मनुष्य के जीवन को अनुशासन और आत्मिक शांति की ओर ले जाता है। इंद्रियों और मन पर नियंत्रण रखना ही संयम का मूल भाव है।

उन्होंने कहा कि इच्छाओं, क्रोध, लोभ, मोह और कषायों पर नियंत्रण के माध्यम से मनुष्य आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकता है। संयम केवल बाहरी नियमों का पालन नहीं, बल्कि विचार, वाणी और व्यवहार को मर्यादित रखने का मार्ग है। उन्होंने श्रद्धालुओं से संयम को जीवन में अपनाने और आत्मशुद्धि की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

भगवान शीतलनाथ जी का हुआ महामस्तकाभिषेक

सुगंध दशमी के अवसर पर जैन समाज की ओर से विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना कर सुगंधित द्रव्यों से धार्मिक विधान संपन्न किए। इस दौरान कहा गया कि जिस प्रकार सुगंध वातावरण को सुवासित करती है, उसी प्रकार अच्छे विचार, सदाचार और संयम मनुष्य के जीवन को भी सुगंधित बनाते हैं।

वहीं मुनि सुब्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भगवान शीतलनाथ जी का महामस्तकाभिषेक श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अभिषेक में शामिल हुए। पूजा-पाठ और धार्मिक मंत्रोच्चार से मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-शांति और आत्मकल्याण की कामना की।

पर्युषण पर्व के संदेश को आत्मसात करते हुए श्रद्धालुओं ने संयम, सदाचार और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।चलने का संकल्प लिया।

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