उत्तम सत्य धर्म ने दिया आत्मशुद्धि और आत्ममंथन का संदेश, दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन मंदिरों में उमड़ी श्रद्धा

उत्तम सत्य धर्म ने दिया आत्मशुद्धि और आत्ममंथन का संदेश, दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन मंदिरों में उमड़ी श्रद्धा
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प्रबोधिनी परीक्षा और धार्मिक अन्ताक्षरी ने बांधा समां, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने लिया उत्साहपूर्वक हिस्सा

शाहबाज ख़ाँ, जिला संवाददाता

रामपुर। दशलक्षण महापर्व के आध्यात्मिक वातावरण में रविवार को जैन समाज ने उत्तम सत्य धर्म की आराधना की। दस धर्मों में पांचवें धर्म के रूप में माने जाने वाले उत्तम सत्य ने श्रद्धालुओं को केवल सत्य बोलने ही नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म में एकरूपता रखते हुए सत्य को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया।

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सुबह से ही जैन मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और स्वाध्याय का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं ने उत्तम सत्य धर्म के मर्म को समझते हुए आत्मचिंतन किया। धार्मिक आयोजनों के बीच कहीं ज्ञान की परीक्षा हुई तो कहीं धर्म से जुड़े सवालों की अन्ताक्षरी ने मंदिर परिसर के वातावरण को भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना दिया।

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*मन, वचन और कर्म में एकरूपता ही उत्तम सत्य*

उत्तम सत्य धर्म का मूल संदेश है कि मनुष्य को किसी भी परिस्थिति में असत्य का सहारा नहीं लेना चाहिए। लोभ, भय, क्रोध, स्वार्थ या मोह के कारण बोला गया झूठ भले ही तत्काल लाभ पहुंचाए, लेकिन इससे व्यक्ति की आत्मिक शुद्धता प्रभावित होती है।

जैन दर्शन में सत्य केवल जुबान से निकले शब्दों तक सीमित नहीं है। सत्य का वास्तविक स्वरूप तब सामने आता है, जब व्यक्ति के विचार, वाणी और व्यवहार में छल-कपट न हो। मन में कुछ और और जुबान पर कुछ और रखना उत्तम सत्य की भावना के विपरीत माना गया है।

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84 कोस मथुरा से आए शास्त्री नमन जैन ने उत्तम सत्य धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि सत्य का पालन केवल बोलने तक सीमित नहीं होना चाहिए। मनुष्य को अपने जीवन में ऐसी पारदर्शिता लानी चाहिए कि उसे अपनी कही हुई बात को छिपाने या बदलने की आवश्यकता ही न पड़े।

वहीं शास्त्री आर्जव जैन ने कहा कि उत्तम सत्य का अर्थ किसी को कटु वचन कहकर आहत करना नहीं है। सत्य के साथ विवेक, मर्यादा और मधुरता का होना भी आवश्यक है।

*मौखिक जैन धर्म प्रबोधिनी परीक्षा में दिखा उत्साह*

उत्तम सत्य धर्म के अवसर पर श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में वैद्य बांकेलाल जैन संस्थान की ओर से मौखिक जैन धर्म प्रबोधिनी परीक्षा का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों से जैन धर्म, दर्शन, सिद्धांत और धार्मिक विषयों से जुड़े सवाल पूछे गए।

प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ परीक्षा में हिस्सा लिया। आयोजन का उद्देश्य धार्मिक ज्ञान की परीक्षा लेने के साथ-साथ जैन धर्म के सिद्धांतों के अध्ययन और नई पीढ़ी में धार्मिक ज्ञान के प्रति रुचि को बढ़ावा देना रहा।

*धार्मिक अन्ताक्षरी ने बढ़ाई आयोजन की रौनक*

वहीं श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सिविल लाइंस में धार्मिक अन्ताक्षरी का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भजनों, धार्मिक पंक्तियों और जैन धर्म से जुड़े विषयों के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम ने मंदिर परिसर को भक्तिमय बना दिया।

धार्मिक अन्ताक्षरी में धर्म के साथ मनोरंजन और ज्ञान का भी सुंदर समन्वय देखने को मिला। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म ने श्रद्धालुओं को स्वयं के भीतर झांकने और आत्ममंथन का अवसर दिया। क्या हमारी वाणी सत्य है? क्या हमारे विचार सत्य हैं? क्या हमारे कर्म हमारी बातों के अनुरूप हैं? ऐसे सवालों ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर भारत भूषण जैन, राहुल जैन, स्वाति जैन, रोहित जैन, अंकित जैन, डॉ. शीनू जैन, शिखर जैन, आयुषी जैन, विवेक खंडेलवाल, दिनेश जैन खंडेलवाल, एडवोकेट प्रमोद जैन, दिनेश जैन सेठी, डॉ. ज्ञानेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।

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