चीन में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ी कार्रवाई: टॉप बैंकर को मिली मौत की सजा

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  • 156 मिलियन डॉलर की रिश्वत का था आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने कहा—“अपराध अत्यंत गंभीर”

बीजिंग, 9 दिसंबर।चीन ने मंगलवार को अपने एक शीर्ष वित्तीय अधिकारी को भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में मौत की सजा देकर एक बार फिर स्पष्ट संकेत दिया है कि वह रिश्वतखोरी के मामलों में किसी भी सूरत में नरमी नहीं बरतेगा। सरकारी मीडिया के अनुसार, चाइना हुआरोंग इंटरनेशनल होल्डिंग्स (CHIH) के पूर्व जनरल मैनेजर बाई तियानहुई को आज तियानजिन में मृत्युदंड देकर दंडित किया गया।

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2014–2018 के बीच ली थी 156 मिलियन डॉलर की रिश्वत

अदालत की जाँच में पाया गया कि बाई तियानहुई ने विभिन्न प्रोजेक्ट फाइलों को मंजूरी देने और वित्तीय फैसलों में लाभ पहुंचाने के बदले करीब 156 मिलियन डॉलर (लगभग 1402 करोड़ रुपये) की रिश्वत ली। यह राशि चीन की न्यायिक भाषा में “अत्यधिक विशाल” और “राष्ट्रीय हितों को गंभीर क्षति पहुँचाने वाली” मानी गई।

अपीलीय अदालत ने भी राहत देने से किया इनकार

मार्च 2024 में निचली अदालत ने बाई को मौत की सजा सुनाई थी। इस फैसले को उन्होंने अपील में चुनौती दी, लेकिन तियानजिन हाई पीपुल्स कोर्ट ने फरवरी 2025 में अपील खारिज कर दी। इसके बाद चीन के सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट ने भी समीक्षा में कहा कि अपराध “बेहद गंभीर” है और दोषी को किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जा सकती।

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परिजनों से अंतिम मुलाकात के बाद दी गई सजा

सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, मृत्युदंड लागू करने से पहले बाई तियानहुई को उनके परिजनों से अंतिम बार मिलने की अनुमति दी गई। इसके बाद मंगलवार सुबह तय प्रक्रिया के अनुसार सजा को अंजाम दिया गया।

हुआरोंग ग्रुप में यह दूसरी बड़ी कार्रवाई

चाइना हुआरोंग में इससे पहले भी एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला सामने आया था। वर्ष 2021 में कंपनी के पूर्व चेयरमैन लाई शाओमिन को भी रिश्वतखोरी के मामले में मौत की सजा दी गई थी। वित्तीय क्षेत्र में लगातार बड़े घोटाले सामने आने के बाद चीन ने इस सेक्टर में कठोर निगरानी और दंड की नीति लागू कर रखी है।

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भ्रष्टाचार पर “जीरो टॉलरेंस” का संदेश

विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी उच्च-स्तरीय फांसी चीन के वित्तीय तथा सरकारी ढांचे को यह संकेत देती है कि रिश्वतखोरी के मामलों में कोई भी पद या प्रभाव सुरक्षा कवच नहीं बन सकता।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन चीन में मौत की सजा के इस्तेमाल पर सवाल भी उठाते रहे हैं, लेकिन बीजिंग अपनी “जीरो टॉलरेंस” नीति पर अडिग है।

 

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