- 4 गर्लफ्रेंड की चैट मिलीं, 3 इस समय प्रेग्नेंट—IAS समझकर कर रहीं थीं रिश्ता
- सोशल मीडिया पर IAS की इमेज बनाने में साले और दोस्त की मदद
- यूपी–बिहार–एमपी–झारखंड में फैलाया सरकारी ठेकों का फर्जी नेटवर्क
- 5 लाख महीने का प्रोटोकॉल खर्च, इनोवा पर लाल-नीली बत्ती और 15 लोगों की टीम
न्यूज़ डेस्क
गोरखपुर :पुलिस ने एक ऐसे ठग को गिरफ्तार किया है, जिसने IAS अफसर बनकर चार राज्यों में अपना जाल फैला रखा था। गौरव कुमार सिंह उर्फ ललित किशोर सिर्फ प्रोटोकॉल बनाए रखने के लिए हर महीने करीब 5 लाख रुपये उड़ा देता था। उसके आगे-पीछे 10–15 लोगों की टीम, सफेद इनोवा, लाल-नीली बत्ती और अफसरों जैसा रौब… सब कुछ बिल्कुल असली लग रहा था।
यह भी पढ़े
https://nationstationnews.com/latest-news/6858/
गांवों में दौरे, गाड़ी पर बत्ती… असली SDM से टकराया तो दो थप्पड़ मार दिए
गौरव अक्सर गांवों के दौरे करता था, सरकारी औचक निरीक्षण जैसे दिखावे करता था। बिहार के भागलपुर के एक गांव में असली SDM से उसकी टक्कर हो गई। SDM ने बैच और रैंक पूछी तो गौरव ने उल्टा उन्हें दो थप्पड़ मार दिए। चौंकाने वाली बात—SDM ने इसकी शिकायत तक नहीं की।
फोन से खुला राज: 4 गर्लफ्रेंड, जिनमें से 3 प्रेग्नेंट
गिरफ्तारी के बाद उसके मोबाइल जब्त हुए तो पुलिस भी दंग रह गई। चैट्स में पता लगा कि उसकी 4 गर्लफ्रेंड थीं और उनमें 3 गर्लफ्रेंड प्रेग्नेंट हैं। सभी उसे IAS समझकर रिश्ते में थीं। इतना ही नहीं, उसने बिहार की एक लड़की से शादी भी कर रखी थी।
यह भी पढ़े
https://nationstationnews.com/latest-news/6848/
सोशल मीडिया पर IAS बनने का ‘ओपरेशन’: साला और दोस्त थे मास्टरमाइंड
गौरव के इस फर्जी IAS ऑपरेशन में उसका साला अभिषेक कुमार सबसे बड़ा खिलाड़ी था। सोशल मीडिया पर IAS इमेज बनाने के लिए फोटो, वीडियो और फर्जी पोस्ट तैयार किए जाते थे।
जालसाजी का नेटवर्क बढ़ाने के लिए उन्होंने गोरखपुर के परमानंद गुप्ता को सेट किया, जो अभिषेक का करीबी था।
3 साल में ठगी का साम्राज्य 4 राज्यों में
गौरव ने सिर्फ तीन साल में फर्जी IAS नेटवर्क को यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड तक फैला दिया।
वह बिल्डरों और कारोबारियों को सरकारी विभागों में ठेके दिलाने का झांसा देता था और मोटी रकम लेता था।
यह भी पढ़े
https://nationstationnews.com/latest-news/6844/
पुलिस को उम्मीद—अब और बड़े राज खुलेंगे
गोरखपुर पुलिस को शक है कि इस गिरोह की मदद कई और जिलों में भी मिल रही थी। बरामद मोबाइल और दस्तावेजों से बड़े खुलासे की उम्मीद है।


