- विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल ने प्रस्ताव पारित किया, UGC मानकों के अनुसार तैयार होगी नई व्यवस्था
न्यूज़ डेस्क
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए पार्ट-टाइम PhD कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिए गए इस फैसले से नौकरीपेशा युवाओं, कॉलेज-स्कूल के शिक्षकों और कार्यरत पेशेवरों को शोध का अवसर मिलेगा। नई व्यवस्था यूजीसी के मानकों के अनुरूप लागू की जाएगी।
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नौकरी करते हुए भी कर सकेंगे शोध
अब तक PhD के लिए कड़े रेजिडेंसी नियम और फुल-टाइम उपस्थिति की शर्तों के कारण कई लोग शोध नहीं कर पाते थे। नई पॉलिसी के बाद कर्मचारी, अध्यापक और कार्यरत शोधकर्ता अपनी नौकरी जारी रखते हुए पार्ट-टाइम आधार पर PhD कर सकेंगे। इससे प्रदेश में शोध गतिविधियों के बढ़ने की उम्मीद है।
चार से छह वर्ष तक होगी PhD की अवधि
HPU प्रशासन के अनुसार पार्ट-टाइम PhD की न्यूनतम अवधि चार वर्ष और अधिकतम छह वर्ष होगी। शोधकर्ताओं को नियमित रिपोर्टिंग, coursework और प्रगति मूल्यांकन अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। विश्वविद्यालय इस संरचना को यूजीसी के फुल-टाइम PhD रेगुलेशन की तर्ज पर लागू करेगा।
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जॉइंट सुपरविजन और उद्योग से सहयोग का रास्ता खुलेगा
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने संकेत दिया है कि कुछ शोध विषयों में जॉइंट सुपरविजन की व्यवस्था भी शुरू की जा सकती है, जिससे DRDO, R&D लैब, उद्योग और बाहरी संस्थानों से विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे शोध का दायरा बढ़ेगा और छात्रों को व्यावहारिक अवसर मिलेंगे।
प्रवेश प्रक्रिया भी बदलेगी
PhD प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय NET/अन्य योग्यता परीक्षा और साक्षात्कार के संयोजन पर जोर देगा। अलग से प्रवेश परीक्षा आयोजित न करने पर भी सहमति बनी है। शोध पर्यवेक्षकों के लिए गाइडलाइंस और सुपरविजन क्षमता भी संशोधित की जा रही है।
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शोध के क्षेत्र में बढ़ेगा भागीदारी का दायरा
पार्ट-टाइम PhD मॉडल के लागू होने से प्रदेश के शिक्षकों, निजी-सरकारी कर्मचारियों और प्रोफेशनल्स के लिए उच्च शिक्षा का रास्ता खुल जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि इससे प्रदेश की शोध संस्कृति को नई दिशा मिलेगी और अधिक लोग रिसर्च गतिविधियों से जुड़ सकेंगे।
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