- आजम खान और जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की कार्रवाई, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की भी जांच
- किसानों की जमीन पर कब्जे और सरकारी परियोजनाओं की धनराशि के इस्तेमाल को लेकर जांच तेज, 19 अगस्त को हुई थी छापेमारी
रामपुर से शाहबाज़ खान, जिला संवाददाता
रामपुर। मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। एजेंसी के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियों का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि उनका मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये आंका गया है।
ईडी की 28 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, समाजवादी पार्टी के नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान तथा अन्य लोगों से जुड़े मामले की जांच के तहत की गई है। यूनिवर्सिटी का संचालन जौहर ट्रस्ट करता है, जिसकी स्थापना आजम खान ने की थी।
किसानों की जमीन पर कब्जे का आरोप
ईडी के अनुसार, रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर जांच शुरू की गई थी। इन मामलों में आरोप लगाया गया कि यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा किया गया। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में सिंहनखेड़ा गांव में करीब 34 एकड़ क्षेत्रफल वाले 45 भूखंडों से संबंधित कथित अवैध कब्जे का उल्लेख किया गया है।
एजेंसी का कहना है कि संबंधित जमीन की लीज रद्द होने के बावजूद उस पर कब्जा बनाए रखा गया था। ईडी की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, शत्रु संपत्ति के कस्टोडियन ने जिला प्रशासन के माध्यम से संबंधित जमीन का कब्जा वापस ले लिया है।
सरकारी धन के इस्तेमाल की भी जांच
जांच के दौरान ईडी को कथित तौर पर जानकारी मिली कि सरकारी निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित धनराशि का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में किया गया। एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, सरकारी ठेके हासिल करने वाले कुछ ठेकेदारों ने ठेकों से प्राप्त धनराशि का एक हिस्सा दान के रूप में ट्रस्ट को वापस दिया।
प्रेस विज्ञप्ति में विधायक एवं विधान परिषद सदस्य की स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से करीब 6.60 करोड़ रुपये के कार्य यूनिवर्सिटी परिसर में कराए जाने का भी उल्लेख है। इसके अलावा पंडाल, ओबीसी बालक छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 23.41 करोड़ रुपये की मंजूरी दिए जाने की बात कही गई है।
ईडी के अनुसार, वर्ष 2015 में पंडाल निर्माण के लिए 12.16 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। इसके साथ शर्त थी कि पंडाल का स्वामित्व संस्कृति विभाग के पास रहेगा और राज्य सरकार उसका निःशुल्क उपयोग कर सकेगी। एजेंसी का आरोप है कि वर्ष 2016 में आदेश में बदलाव कर पंडाल का स्वामित्व यूनिवर्सिटी को दे दिया गया तथा सरकारी उपयोग से जुड़ी शर्त हटा दी गई।
426.46 करोड़ रुपये के स्रोत पर उठे सवाल
ईडी की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी परिसर की 59 इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी। जमीन की कीमत 4.63 करोड़ रुपये जोड़ने पर कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये बताई गई।
एजेंसी का कहना है कि ट्रस्ट ने आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दिखाया था। जांच में 12.29 करोड़ रुपये के दान को गैर-वास्तविक बताए जाने के बाद ईडी ने 66.03 करोड़ रुपये को वास्तविक खर्च माना। अन्य स्रोतों से मिले 6.60 करोड़ रुपये को जोड़कर कुल 72.63 करोड़ रुपये का ही स्पष्टीकरण मिलने की बात कही गई है।
ईडी के मुताबिक, शेष 426.46 करोड़ रुपये के स्रोत का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला। इसी आधार पर संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने की कार्रवाई की गई है।
अगस्त में यूनिवर्सिटी परिसर पर हुई थी छापेमारी
ईडी ने बताया कि 19 अगस्त 2026 को जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े परिसरों में तलाशी ली गई थी। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और जांच से संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए थे।
प्रेस विज्ञप्ति में रामपुर में वर्ष 2016 के दौरान मकानों को गिराए जाने, लोगों के साथ मारपीट और नगर पालिका की सफाई मशीनों को यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंचाने से संबंधित मामलों का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी के अनुसार, इन मामलों में दर्ज एफआईआर और पुलिस के आरोपपत्रों को भी जांच में शामिल किया गया है।
ईडी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के संबंध में 13 अक्टूबर 2026 को अजीमनगर थाने में एफआईआर संख्या 0224/2026 भी दर्ज कराई गई थी। इसमें आजम खान, जौहर ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज होने का उल्लेख है।
फिलहाल मामले में जांच जारी है। संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करना जांच के तहत की गई कार्रवाई है। ईडी के आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।



