- शौचालयों की सफाई न रखने पर ठेकेदारों पर ₹1 लाख प्रतिदिन जुर्माना
- कई जगह बंद या पानीहीन टॉयलेट बने यात्रियों की समस्या
- सफल हुआ तो भविष्य में हर टोल प्लाज़ा पर बढ़ेगी जवाबदेही
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2025 — राष्ट्रीय उच्चमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) के टोल प्लाजा शौचालयों की अस्वच्छता की शिकायत करने पर यात्रियों को ₹1,000 का FASTag रिचार्ज दिया जाएगा। यह योजना 31 अक्टूबर 2025 तक लागू रहेगी। 
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क्या है यह स्कीम — नियम एवं शर्तें
• यात्रियों को “Rajmargyatra” ऐप का नवीनतम संस्करण डाउनलोड करना होगा। 
• किसी टोल प्लाजा शौचालय की अस्वच्छ स्थिति की clear, geo-tagged और time-stamped फोटो उसी ऐप से अपलोड करनी होगी, साथ में नाम, मोबाइल नंबर और वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर (VRN) देना होगा। 
• यदि शिकायत मान्य और पहला (first valid) हुई, तो ₹1,000 सीधे उसी VRN के FASTag खाते में रिचार्ज किया जाएगा। 
• प्रत्येक VRN को पूरे कार्यक्रम अवधि में केवल एक बार यह लाभ मिलेगा। 
• एक ही शौचालय सुविधा (toilet facility) पर दिन में एक ही रिपोर्ट स्वीकार होगी — यदि कई लोग उसी दिन शिकायत करें, तो पहले वैध रिपोर्ट को ही माना जाएगा। 
• यह योजना केवल उन शौचालयों पर लागू होगी जो NHAI के अंतर्गत बनाए, संचालित या रखरखाव किए जाते हों — पेट्रोल पंप, ढाबे या अन्य निजी संस्थाओं की शौचालयें इस योजना में शामिल नहीं हैं। 
• शिकायतों का सत्यापन AI-सहायता और मैनुअल जांच द्वारा किया जाएगा। 
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जुर्माने की व्यवस्था — सफाई न होने पर कार्रवाई
इस योजना के साथ ही NHAI ने यह भी कहा है कि जिन ठेकेदारों / ऑपरेटरों की ओर से शौचालयों की सफाई बनाए रखने में लापरवाही की जाएगी, उन पर ₹1,00,000 (एक लाख रुपए) प्रतिदिन तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। 
NHAI के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के दंड और सार्वजनिक भागीदारी योजनाएँ अनुशासन बनाए रखने में मदद करेंगी। 
चुनौतियाँ और संशय
इस योजना की घोषणा स्वागत योग्य है, लेकिन इसे लेकर कुछ स्वास्थ्य, निगरानी और व्यवहारिक कठिनाइयाँ भी उठ रही हैं:
• यात्री शिकायत करते हैं कि कई शौचालय लॉक रहते हैं, खराब स्थिति में रहते हैं या पानी नहीं मिलता। 
• कुछ लोगों का कहना है कि टोल प्लाज़ा पर यह नहीं पता चलता कि कौन-सी शौचालय NHAI की है, इसलिए शिकायत करना मुश्किल होता है। 
• एक अभियान की अवधि सीमित है (31 अक्टूबर तक) — दीर्घकालीन सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है, न कि केवल इधर-उधर शिकायतों पर भरोसा। 
• अभियान की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि नियमित निगरानी, संसाधन और जनता की भागीदारी किस तरह बनी रहे।
निष्कर्ष
NHAI की यह पहल एक नयी कोशिश है — सार्वजनिक स्वच्छता को लेकर यात्रियों को भी सक्रिय भागीदार बनाना। यदि यह सफल होती है, तो राजमार्गों पर शौचालयों की स्थिति में सुधार हो सकता है, और लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा। लेकिन यह तभी संभव है जब योजना सिर्फ “चुनावी अवधि” तक सीमित न रह जाए, बल्कि नियमित रखरखाव और जवाबदेही सुनिश्चित हो।
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