- वायरल वीडियो में चालक ने लाइव दिखाईं बस की तकनीकी खामियां, दावा—बार-बार शिकायत के बावजूद जबरन ड्यूटी कराई जा रही है।
- सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) और वरिष्ठ केंद्र प्रभारी पर गंभीर आरोप, यात्रियों के साथ चालक-परिचालक की जान भी हर पल खतरे में होने का दावा।
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के नजीबाबाद डिपो से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक रोडवेज चालक ड्यूटी के दौरान बस की तकनीकी खामियों का लाइव वीडियो बनाते हुए दावा करता है कि बस का ब्रेक प्रेशर लगातार डाउन हो रहा है, ब्रेक सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं और वह अब तक तीन बार बड़ी मुश्किल से बस को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचा चुका है।
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वीडियो में चालक बेहद परेशान दिखाई देता है। उसका कहना है कि उसने बस की खराब स्थिति और तकनीकी खामियों की जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों को दी, लेकिन शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय उसे कथित रूप से उसी खराब बस को मार्ग पर ले जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। चालक का आरोप है कि बस तकनीकी रूप से अनफिट होने के बावजूद नजीबाबाद डिपो के अधिकारी उसे लगातार संचालन में लगाए हुए हैं।
चालक वीडियो में सीधे तौर पर सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) और वरिष्ठ केंद्र प्रभारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए दावा करता है कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण चालक और परिचालकों को अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करनी पड़ रही है। उसका कहना है कि हर सफर इस डर के साथ पूरा होता है कि कहीं ब्रेक पूरी तरह जवाब न दे दें और कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
यदि वीडियो में लगाए गए आरोप सही हैं, तो मामला केवल एक खराब बस का नहीं, बल्कि पूरे फिटनेस निरीक्षण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। आखिर ऐसी बस को संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई? क्या फिटनेस प्रमाणपत्र केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गए हैं? क्या बसों की वास्तविक तकनीकी जांच की जाती है या सिर्फ रिकॉर्ड पूरे किए जाते हैं?
सबसे गंभीर बात यह है कि ऐसी स्थिति में खतरा केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहता। चालक और परिचालक भी हर पल अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने को मजबूर होते हैं। यदि ब्रेक प्रेशर अचानक पूरी तरह खत्म हो जाए, तो कुछ ही क्षणों में बड़ी दुर्घटना हो सकती है, जिसकी कीमत दर्जनों निर्दोष यात्रियों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती है।
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परिवहन निगम लगातार सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा के दावे करता है, लेकिन वायरल वीडियो इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि एक चालक खुलेआम कैमरे पर अपनी जान का खतरा बताते हुए मदद की गुहार लगा रहा है, तो यह केवल व्यक्तिगत शिकायत नहीं बल्कि पूरे तंत्र की कार्यशैली पर सवाल है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या परिवहन विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी बस के खाई में गिरने या कई यात्रियों की जान जाने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी? यदि चालक के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो केवल तकनीकी कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने कथित तौर पर खराब बस को सड़क पर उतारने की अनुमति दी।
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