- उत्तर हिंद महासागर में 2-3 चक्रवाती तूफान बनने की संभावना; तेज हवाओं और भारी बारिश का खतरा, समुद्री इलाकों में सतर्कता जरूरी
नई दिल्ली। अक्टूबर से दिसंबर के बीच उत्तर हिंद महासागर में चक्रवाती गतिविधियां बढ़ने की संभावना को लेकर मौसम विभाग और वैज्ञानिक संस्थानों की निगाहें टिकी हैं। ISRO के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC) के Meteorological & Oceanographic Satellite Data Archival Centre (MOSDAC) ने 8 सितंबर 2026 को उत्तर हिंद महासागर के लिए मौसमी उष्णकटिबंधीय चक्रवात पूर्वानुमान जारी किया है।
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83% ज्यादा ताकतवर होने के दावे की पुष्टि जरूरी
सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में संभावित चक्रवातों की ताकत सामान्य से 83 प्रतिशत अधिक होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक ISRO/MOSDAC सामग्री में इस 83% आंकड़े की स्पष्ट पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए इसे फिलहाल आधिकारिक चेतावनी के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। चक्रवात बनने के बाद उसकी वास्तविक तीव्रता, दिशा और लैंडफॉल का आकलन नियमित मौसम बुलेटिनों से किया जाएगा।
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तेज हवा और भारी बारिश से बढ़ सकता है खतरा
उत्तर हिंद महासागर में अक्टूबर-दिसंबर चक्रवातों के लिहाज से महत्वपूर्ण अवधि होती है। चक्रवाती सिस्टम विकसित होने पर तेज हवाएं, भारी बारिश, समुद्र में ऊंची लहरें और तटीय क्षेत्रों में जलभराव जैसी स्थिति बन सकती है। ISRO के अनुसार भारत के दोनों तट उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के लिहाज से संवेदनशील हैं और अक्टूबर-दिसंबर में चक्रवाती गतिविधि का प्रमुख दौर रहता है।
अभी किसी खास चक्रवात का नाम, लैंडफॉल स्थान या तारीख घोषित नहीं हुई है। इसलिए लोगों को अफवाहों से बचते हुए IMD और MOSDAC के आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करने की सलाह दी जाती है। MOSDAC अपने प्लेटफॉर्म पर सैटेलाइट आधारित चक्रवात अवलोकन और रियल-टाइम पूर्वानुमान उपलब्ध कराता है।
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