- इस सीजन में करीब 20,000 टन पराली के पेलेट्स की खपत का अनुमान, भट्ठा मालिकों से सप्लाई सुनिश्चित करने की अपील
सुरेश रहेजा जिला संवाददाता
बठिंडा, 24 अक्टूबर। वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और धान की पराली जलाने की समस्या को रोकने के लिए बठिंडा जिला प्रशासन ने ईंट भट्टों में पराली से बने पेलेट्स के इस्तेमाल पर जोर दिया है। डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान ने स्पष्ट किया कि कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM), नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के अनुसार ईंट बनाने में ईंधन के तौर पर 30 प्रतिशत धान की पराली के पेलेट्स का इस्तेमाल करना जरूरी है।
इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर ने जिले के ईंट भट्ठा मालिकों के साथ बैठक की और निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पेलेट्स की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
जिले के 143 भट्टों में खपत होंगे 20 हजार टन पेलेट्स
डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान ने बताया कि बठिंडा जिले में कुल 143 ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं। मौजूदा सीजन में इन भट्टों के लगभग पांच महीने तक संचालन के दौरान करीब 20,000 टन धान की पराली से बने पेलेट्स इस्तेमाल किए जाने का अनुमान है।
उन्होंने भट्ठा मालिकों से अपील की कि वे अपने आसपास संचालित पेलेट निर्माण इकाइयों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करें, ताकि ईंधन के रूप में पेलेट्स की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे और निर्धारित नियमों का पालन किया जा सके।
पराली जलाने पर रोक और पर्यावरण संरक्षण में मिलेगी मदद
डीसी ने कहा कि ईंट निर्माण में कोयले के साथ पराली के पेलेट्स का इस्तेमाल करने से खेतों में पराली जलाने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे कृषि अवशेषों का उपयोगी विकल्प के रूप में इस्तेमाल भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने भट्ठा मालिकों से पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की।
बैठक में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पूर्व इंजीनियर रूबी सिद्धू, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) गुरतार सिंह, जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी (DFSO) हर्षित मेहता सहित ईंट भट्ठा मालिक और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
स्रोत: बठिंडा जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी।



