- 11 महीने बाद जेल से बाहर आए पिता-पुत्र, जेल के गेट पर ईडी ने आजम खान को लिया हिरासत में; समर्थकों के सामने भावुक हुए अब्दुल्ला आजम, बोले- बच्चों की शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय बनाने की मिली सजा
रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की करीब 11 महीने 14 दिन बाद 31 अक्टूबर को रामपुर जेल से रिहाई हुई। हालांकि, आजम खान की जेल से बाहर आने की खुशी कुछ ही पलों में एक नए कानूनी घटनाक्रम में बदल गई। जेल के मुख्य द्वार पर मौजूद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने उन्हें जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हिरासत में ले लिया। वहीं, अब्दुल्ला आजम रिहा होकर सफेद कार से अपने घर के लिए रवाना हुए।
रास्ते में समर्थकों की भारी भीड़ देखकर अब्दुल्ला आजम भावुक हो गए। उन्होंने कार की सनरूफ से बाहर आकर समर्थकों को संबोधित किया और अपने पिता के समर्थन में कई बातें कहीं। उन्होंने कहा, “आजम को उनके ख्वाब की सजा मिल रही है। हमें हमारे नाम की सजा मिल रही है। हमारा नाम अगर आजम, अब्दुल्ला न होता, तो शायद सब ठीक रहता।”
अब्दुल्ला आजम ने कहा कि उनके पिता का सपना रामपुर में बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय स्थापित करना था। उनके मुताबिक, इसी सपने को लेकर आजम खान को लगातार कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “आजम तो आजम था, आजम है और आजम ही रहेगा।”
‘हमारी गलती सिर्फ इतनी थी कि बच्चों की शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय बनाया’
समर्थकों को संबोधित करते हुए अब्दुल्ला आजम ने कहा कि उनके पिता ने रामपुर में शिक्षा के लिए संस्थान स्थापित करने का सपना देखा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार को लगातार अलग-अलग मुकदमों में घेरा जा रहा है। उन्होंने भैंस, बकरी और मुर्गी चोरी जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से उनका परिवार कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि उनके परिवार को जिस तरह की परिस्थितियों से गुजरना पड़ा है, उसके बावजूद वे अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि भविष्य में उनके पिता के खिलाफ और भी मामलों में सजा सुनाई जा सकती है।
‘कानूनी लड़ाई जारी रहेगी, पीछे नहीं हटेंगे’
अब्दुल्ला आजम ने कहा कि उनका परिवार अदालतों में अपना पक्ष रख रहा है और कानूनी लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने समर्थकों से दुखी न होने की अपील करते हुए अपने पिता के प्रति विश्वास जताया।
गौरतलब है कि आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड बनवाने के मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर 2026 को उनकी सजा निलंबित करते हुए जमानत दी थी। इसी आधार पर दोनों 31 अक्टूबर को रामपुर जेल से बाहर आए थे।
गाजियाबाद की अदालत ने भेजा 14 दिन की न्यायिक हिरासत में
आजम खान को ईडी ने जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया। इसके बाद 1 नवंबर को गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। उन्हें गाजियाबाद की डासना जेल भेजा गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने रामपुर की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। अब सबकी निगाहें आगामी न्यायिक कार्रवाई और आजम खान की कानूनी लड़ाई पर टिकी हैं।
रामपुर से शाहबाज़ खान, जिला संवाददाता



