- भारत मंडपम में जुटे 11 देशों के नेता; व्यापार, ऊर्जा, AI और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था पर मंथन
- सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग, शाम को पीएम मोदी से अहम द्विपक्षीय बैठक
नई दिल्ली, 12 सितंबर। भारत की मेजबानी में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हो गया है। दो दिवसीय इस सम्मेलन में BRICS के 11 सदस्य देशों के नेता और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई प्रमुख नेता दिल्ली में मौजूद हैं।
मोदी-जिनपिंग मुलाकात सबसे अहम
सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आज होने वाली द्विपक्षीय बैठक पर खास नजर है। शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। दोनों नेताओं की बातचीत में भारत-चीन संबंधों, सीमा से जुड़े मुद्दों, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा सहित कई विषयों पर चर्चा की उम्मीद है। रिपोर्टों के अनुसार बैठक शाम करीब 5:45 बजे भारत मंडपम में प्रस्तावित है।
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव रहा है। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य दिशा में ले जाने की कोशिश की है। ऐसे में मोदी-जिनपिंग वार्ता को दोनों देशों के रिश्तों के अगले चरण के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
पुतिन और पेजेशकियन से पहले ही हुई बातचीत
BRICS सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया।
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BRICS के एजेंडे में क्या?
इस बार सम्मेलन में व्यापार और निवेश, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक शासन में सुधार तथा भुगतान प्रणालियों जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। BRICS देशों में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और डॉलर पर निर्भरता कम करने के विकल्पों पर भी चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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भारत के लिए यह सम्मेलन कूटनीतिक रूप से भी बेहद अहम है। एक ओर नई दिल्ली रूस और ईरान के साथ रणनीतिक संबंध बनाए हुए है, वहीं चीन के साथ रिश्तों को स्थिर करने और पश्चिमी देशों के साथ अपनी साझेदारी को संतुलित रखने की चुनौती भी सामने है।
दुनिया की नजर अब खास तौर पर मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर है—क्या दोनों नेताओं की बातचीत भारत-चीन संबंधों में नई गर्माहट का रास्ता खोलेगी, यह सम्मेलन का सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
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