- CJI सूर्यकांत सख्त—14 साल की बच्ची से हिंसा गंभीर, आरोपी खुले घूमकर परिवार को डरा नहीं सकते
नई दिल्ली, 11 सितंबर। सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को कथित तौर पर धमकाने और परेशान किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि बच्चे के खिलाफ हिंसा के आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यदि आरोपी खुले घूम रहे हैं और बच्ची या उसके परिवार को आपराधिक कार्रवाई आगे बढ़ाने से रोकने के लिए डराया-धमकाया जा रहा है, तो यह गंभीर मामला है।
UP और दिल्ली सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकार से मामले में दर्ज FIR, नाबालिग और उसके परिवार की सुरक्षा तथा आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने नाबालिग की ओर से दर्ज FIR पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी कहा।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद सामने आया मामला
मामला जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए Cockroach Janta Party (CJP) के प्रदर्शन से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 14 वर्षीय लड़की प्रदर्शन में शामिल हुई थी। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान उसके पिता के साथ मारपीट की गई और बाद में बच्ची तथा उसके परिवार को कथित तौर पर डराने-धमकाने की कोशिश हुई। अदालत के समक्ष बच्ची के घर पर कथित पथराव का मुद्दा भी उठाया गया।
आरोपी की गिरफ्तारी, अन्य लोगों पर भी सवाल
मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज पर बच्ची के पिता के साथ कथित मारपीट का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने बाद में मामले में अतिरिक्त गंभीर धाराएं जोड़ीं और उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा। सुनवाई के दौरान वकील ने आरोप लगाया कि घटना में शामिल अन्य लोग अभी भी खुले घूम रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्यापक प्रदर्शन की जांच के लिए गठित हाई-पावर्ड कमेटी अपनी जगह काम करती रहेगी, लेकिन नाबालिग की तत्काल सुरक्षा अलग और जरूरी जिम्मेदारी है। अदालत ने संकेत दिया कि बच्ची या उसके परिवार को कानूनी कार्रवाई से पीछे हटने के लिए डराने की किसी भी कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा।



