कुछ घंटों में तबाही, फिर लंबा सूखा! भारत के मानसून पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

Picture of nationstationnews

nationstationnews

 

 

  • भारत के मानसून पर मंडरा रहा नया खतरा, बारिश की मार के बीच सूखे का संकट
  • अल नीनो और जलवायु परिवर्तन का डबल अटैक, भारत के मानसून का बिगड़ा गणित

अवध डिपो में फिर दिखा अनुभवी नेतृत्व का दम!

नई दिल्ली। भारत में इस साल कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और जलभराव ने तबाही मचाई है, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू चिंता बढ़ाने वाला है। देश के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रही है। मौसम का यह विरोधाभास अब भारत के बदलते मानसून पैटर्न की बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है।https://www.facebook.com/share/r/199YSWSkFu/

कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से होगी पुष्प वर्षा, यूपी सरकार ने जारी किया कार्यक्रम; 9-10 अगस्त को इन जिलों में बरसेंगे फूल

विशेषज्ञों के मुताबिक, समस्या केवल बारिश की मात्रा की नहीं, बल्कि बारिश के बदलते तरीके की भी है। कम दिनों में बहुत ज्यादा बारिश और फिर लंबे समय तक बारिश का गायब रहना खेती, जल प्रबंधन, बिजली व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है।

यूपी पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर वायरल पोस्ट फर्जी, आधिकारिक घोषणा का इंतजार

कुछ घंटों की बारिश, फिर लंबा सूखा

लावारिस कार से मिला शव, सालेहनगर चौराहे पर सनसनी

देश के कई इलाकों में बारिश अब पहले की तरह पूरे मानसून सीजन में समान रूप से वितरित नहीं हो रही। कई बार कुछ ही घंटों या दिनों में इतनी बारिश हो जाती है कि बाढ़ की स्थिति बन जाती है, जबकि उसके बाद लंबे समय तक पर्याप्त वर्षा नहीं होती।

 

इससे एक ओर शहरों और गांवों में जलभराव तथा बाढ़ का खतरा बढ़ता है, वहीं दूसरी ओर मिट्टी में नमी और जलाशयों में पानी की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।

 

अल नीनो बढ़ा सकता है चुनौती

 

भारत के लिए एक और चिंता अल नीनो को लेकर है। यह प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान में होने वाला बदलाव है, जिसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है। इसके प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश तो कहीं सूखे जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

 

मौसम में इस तरह की अनिश्चितता भारत जैसे कृषि-निर्भर देश के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यदि बारिश का वितरण बिगड़ता है तो खरीफ फसलों की बुवाई, उत्पादन और किसानों की आय पर असर पड़ सकता है।

 

खेती से लेकर बिजली तक असर

 

बदलते मानसून का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं है। अनियमित बारिश से कृषि, पेयजल, बिजली उत्पादन, शहरी जल निकासी, सड़क और पुलों जैसे बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ सकता है।

 

एक तरफ अचानक भारी बारिश से सड़कें, पुल और शहरों की ड्रेनेज व्यवस्था प्रभावित होती है, वहीं दूसरी तरफ लंबे सूखे की स्थिति में सिंचाई और पेयजल की मांग बढ़ जाती है।

 

भारत के सामने अब सिर्फ बारिश नहीं, ‘बारिश का पैटर्न’ चुनौती

https://www.facebook.com/share/r/199YSWSkFu/

 

गौर सिटी-2 की 14th Avenue सोसायटी में किरायेदारों को लेकर जमकर हंगामा!

किरायेदार को रखने और दस्तावेजों की जांच को लेकर विवाद बढ़ने की बात सामने आई है। वायरल वीडियो में धक्का-मुक्की और मारपीट के आरोप लगाए जा रहे हैं। घटना के बाद सोसायटी की सुरक्षा व्यवस्था और किरायेदारों के पुलिस वेरिफिकेशन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन के दौर में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह समझना है कि भविष्य का मानसून कितना सामान्य रहेगा। बारिश का औसत आंकड़ा सामान्य दिखाई देने के बावजूद यदि वर्षा कुछ चुनिंदा दिनों में केंद्रित हो जाए, तो उसका लाभ कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है।

https://www.facebook.com/share/r/1DRe1pknNP/

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब केवल मानसून की भविष्यवाणी पर निर्भर रहने के बजाय बाढ़ और सूखे दोनों से निपटने की तैयारी मजबूत करनी होगी। बेहतर मौसम पूर्वानुमान, जल संरक्षण, मजबूत ड्रेनेज सिस्टम और जलवायु-अनुकूल खेती इस चुनौती से निपटने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

ट्रेनी IPS पर रेप और हत्या के प्रयास का आरोप, 14 दिन की न्यायिक हिरासत में चंचलगुडा जेल भेजा गया

यानी आने वाले समय में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि भारत में कितनी बारिश हुई, बल्कि यह भी होगा कि बारिश कब, कहां और कितनी देर हुई।

[wps_visitor_counter]