- बरेली क्षेत्र की एमडी स्क्वॉड ने बद्दी के पास औचक छापेमारी में बस संख्या UP78KT1083 से 38 सवारी बिना टिकट मिलने का किया दावा।
- कार्रवाई के बाद नियमित जांच व्यवस्था पर उठे सवाल, रोजाना निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग।
न्यूज़ डेस्क
बदायूं/बद्दी। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बस संख्या UP78KT1083 में एमडी स्क्वॉड की औचक चेकिंग के दौरान बड़ा मामला सामने आया है। बरेली क्षेत्र की एमडी एस्कॉर्ट टीम (वाहन संख्या 3163) ने अचानक की गई जांच में 38 यात्रियों को बिना टिकट पाए जाने का दावा किया है। इस कार्रवाई के बाद न केवल बस के परिचालन पर सवाल उठे हैं, बल्कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली भी चर्चा के केंद्र में आ गई है जिन पर प्रतिदिन जांच और निगरानी की जिम्मेदारी रहती है।
जानकारी के अनुसार यह बस बदायूं से अंबाला, चंडीगढ़, बद्दी होते हुए नालागढ़ (हिमाचल प्रदेश) तक संचालित होती है। मुख्यालय को लंबे समय से अंतरराज्यीय बसों में टिकट चोरी और राजस्व हानि की शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर एमडी स्क्वॉड के टीआई सलमान खान और शिवम ने पंजाब के अंबाला टोल प्लाजा पर औचक चेकिंग अभियान चलाया। जांच के दौरान बस को रोककर जब यात्रियों के टिकटों का मिलान किया गया तो बस में 58 यात्री सवार मिले। इनमें 37 वयस्क और एक बच्चा बेटिकट पाया गया। विभागीय नियमों के अनुसार बच्चे का भी हाफ टिकट बनना अनिवार्य था, लेकिन उसका भी टिकट जारी नहीं किया गया था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यात्रियों से किराया वसूला गया था, लेकिन उन्हें टिकट जारी नहीं किए गए। इससे परिवहन निगम को राजस्व हानि होने की आशंका जताई जा रही है। एमडी स्क्वॉड ने मौके पर पूरी कार्रवाई की और मामले की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी।
जांच के दौरान टीम ने पाया कि 38 यात्रियों के पास टिकट नहीं था। इसके बाद संबंधित परिचालक प्रबल प्रताप सिंह और चालक दिनेश के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है। जिस रूट पर प्रतिदिन विभिन्न स्तरों पर निगरानी और जांच की व्यवस्था रहती है, वहां इतनी बड़ी संख्या में बिना टिकट यात्रियों का मिलना आखिर कैसे संभव हुआ? यदि नियमित जांच प्रभावी ढंग से हो रही थी, तो यह अनियमितता पहले क्यों नहीं पकड़ी गई?
परिवहन विभाग में यह चर्चा भी तेज है कि एमडी स्क्वॉड का काम पूर्व निर्धारित चेकिंग करना नहीं, बल्कि कहीं भी, कभी भी औचक छापेमारी कर वास्तविक स्थिति सामने लाना होता है। ऐसे में इस कार्रवाई ने नियमित जांच व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह अपेक्षा की जा रही है कि विभाग केवल परिचालक की जिम्मेदारी तय करने तक सीमित न रहे, बल्कि यह भी जांच करे कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर रोजाना निगरानी और जांच की जिम्मेदारी थी, उन्होंने कहीं अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही तो नहीं बरती।
परिवहन निगम के जानकारों का मानना है कि यदि औचक जांच में इतनी बड़ी अनियमितता सामने आती है, तो पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इससे न केवल राजस्व की हानि पर अंकुश लगेगा, बल्कि निगम की टिकटिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
एमडी स्क्वॉड की यह कार्रवाई परिवहन निगम के लिए एक स्पष्ट संदेश मानी जा रही है कि बिना टिकट यात्रा और राजस्व हानि के मामलों में अब सख्ती से कार्रवाई की जाएगी तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नियमित जांच व्यवस्था पर भी उठे सवाल
एमडी स्क्वॉड की कार्रवाई के बाद अब उन अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिन पर प्रतिदिन बसों की जांच और निगरानी की जिम्मेदारी रहती है। यदि मुख्यालय की औचक टीम एक ही बस में 38 बेटिकट यात्री पकड़ सकती है, तो नियमित जांच के दौरान यह अनियमितता सामने क्यों नहीं आई? परिवहन विभाग के भीतर अब इस पहलू की भी जांच की मांग तेज हो गई है।
जांच के लिए बुलाए गए चालक और परिचालकक्षेत्रीय प्रबंधक अजीम ने बताया कि बस संख्या UP78KT1083 के चालक दिनेश और परिचालक प्रबल प्रताप सिंह को जांच के लिए बुलाया गया है। पूरे मामले की विभागीय जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध परिवहन निगम के नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एमडी स्क्वॉड की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत है कि परिवहन निगम अब टिकट चोरी और राजस्व हानि के मामलों में कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में लंबी दूरी और अंतरराज्यीय मार्गों पर ऐसे औचक चेकिंग अभियान और तेज किए जाने की संभावना है।





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