बांदा रोडवेज डिपो में 14 हजार लीटर डीजल घोटाले की आंच, तीन लिपिक निलंबित

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  • 14 हजार लीटर डीजल हेराफेरी के आरोप के बाद कार्रवाई, तीन लिपिक निलंबित; शासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट
  • डीजल रिकॉर्ड में वर्षों की गड़बड़ी उजागर, जांच का दायरा बढ़ा तो वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी आ सकती है सामने
  • रिकॉर्ड में गड़बड़ी, शासन तक पहुंची रिपोर्ट; जांच पूरी होने पर बड़े खुलासे की संभावना

ब्यूरो रिपोर्ट 

बांदा। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) के बांदा डिपो में डीजल अनियमितता का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। डीजल सेक्शन में करीब 14 हजार लीटर डीजल की कथित हेराफेरी सामने आने के बाद विभाग ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए तीन लिपिकों को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच सहायक अभियंता (वित्त) को सौंपी गई है और रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।

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जानकारी के अनुसार, 17 जुलाई को डीजल सेक्शन के वरिष्ठ लिपिक ने क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) से शिकायत कर डीजल रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाया था। शिकायत के बाद हुई प्रारंभिक जांच में रिकॉर्ड संधारण और दस्तावेजों में गंभीर खामियां सामने आईं। इसके बाद विभाग ने डीजल सेक्शन से जुड़े अनिल शुक्ला, अनिल साहू और सुधीर सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

रिकॉर्ड में वर्षों से बरती गई लापरवाही

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि डीजल खरीद, भंडारण और वितरण से जुड़े दस्तावेज वर्षों से व्यवस्थित तरीके से नहीं रखे गए। कई अभिलेख अधूरे मिले, जिससे वास्तविक खपत और स्टॉक का मिलान करना मुश्किल हो गया। जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि रिकॉर्ड की गहन जांच की गई तो मामला केवल बांदा डिपो तक सीमित न रहकर बड़े घोटाले का रूप भी ले सकता है।

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वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

सूत्रों के मुताबिक डीजल सेक्शन के रिकॉर्ड तैयार कराने और उनके सत्यापन की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों की भी होती है। ऐसे में केवल लिपिकों पर कार्रवाई से सवाल खत्म नहीं होते। विभागीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जांच का दायरा बढ़ने पर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

शासन की नजर, आगे हो सकती है बड़ी कार्रवाई

विभाग ने जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। जांच पूरी होने के बाद यदि डीजल की हेराफेरी और रिकॉर्ड में गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। रोडवेज मुख्यालय भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

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