- ₹30 करोड़ की परियोजना के लिए UPSRTC ने आमंत्रित की निविदा, 120 डिपो की 14,300 बसें जुड़ेंगी केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम से
लखनऊ, 4 नवंबर 2026। उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और स्मार्ट बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ी पहल की है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बसों का संचालन और डिपो प्रबंधन करेगा। इसके लिए करीब 30 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली केंद्रीकृत बस संचालन एवं डिपो प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। परियोजना के लिए निविदा भी आमंत्रित कर दी गई है।
परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि यह परियोजना भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) योजना के तहत प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य प्रदेश के सभी डिपो की बस सेवाओं का एकीकृत और वैज्ञानिक तरीके से नियोजन करना है।
14,300 बसों के संचालन पर होगी AI की नजर
परिवहन निगम वर्तमान में प्रदेश के 120 डिपो के माध्यम से लगभग 14,300 बसों का संचालन कर रहा है। इन बसों से प्रतिदिन 17 लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी डिपो की समय-सारिणी को एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।
AI तकनीक यात्रियों की संख्या, मार्गों की मांग, यात्रा के समय और उपलब्ध बसों का विश्लेषण करके यह तय करने में मदद करेगी कि किस रूट पर कितनी बसों की जरूरत है और उनके बीच कितना अंतराल होना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी मार्ग पर हर 15 मिनट में बस की आवश्यकता है तो अलग-अलग डिपो की बसों का समय इस तरह निर्धारित किया जा सकेगा कि यात्रियों को नियमित अंतराल पर बसें मिलें और उन्हें लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
इस परियोजना से बसों की फ्रीक्वेंसी बेहतर होने, यात्रियों का प्रतीक्षा समय कम होने और सार्वजनिक परिवहन के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही बसों, ईंधन और मानव संसाधन का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
नई प्रणाली में बसों के रखरखाव, सर्विसिंग, मरम्मत तथा चालकों और परिचालकों की ड्यूटी का भी डिजिटल प्रबंधन किया जाएगा। मुख्यालय और क्षेत्रीय अधिकारी एक ही प्लेटफॉर्म से बसों के संचालन तथा डिपो के प्रदर्शन की निगरानी कर सकेंगे।
परिवहन मंत्री के मुताबिक, बेहतर बस सेवाओं से यात्रियों की संख्या और निगम की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। परिचालन खर्च में बचत और राजस्व में वृद्धि से यात्रियों को भविष्य में और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का रास्ता भी खुलेगा।
हालांकि, इस परियोजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तथा यात्रियों को जमीनी स्तर पर इसका कितना लाभ मिलता है।



