खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को मृदा स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूक

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  • मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के इस्तेमाल और जैविक खेती अपनाने पर दिया जोर
  • रामपुर के 42 चयनित गांवों में 27 नवंबर तक आयोजित होंगे जागरूकता कार्यक्रम

शाहबाज खां जिला संवाददाता रामपुर 

रामपुर। खेतों की मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जनपद में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जा रहा है। अभियान के तहत मंगलवार को विकासखंड मिलक के ग्राम आदपुर मैनी और विकासखंड बिलासपुर के ग्राम पिपलिया विजयनगर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसमें कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने के उपाय बताए।

कार्यक्रम में किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने, जैविक एवं हरी खाद अपनाने, फसल चक्र का पालन करने, फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने और जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग फसलों के बेहतर विकास के लिए जरूरी है। आवश्यकता से अधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग मिट्टी की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए किसानों को जैव उर्वरकों के इस्तेमाल और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना चाहिए।

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र धमोरा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनुज बंशल, कृषि विशेषज्ञ डॉ. विनय कुमार सक्सेना और मिलक के पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. विजय कुमार शर्मा सहित कृषि विभाग के अधिकारियों एवं विषय वस्तु विशेषज्ञों ने किसानों से संवाद किया। इस दौरान किसानों को क्षेत्र के अनुकूल उन्नत बीज प्रजातियों और आधुनिक कृषि यंत्रों के प्रभावी उपयोग की जानकारी भी दी गई।

इसके अलावा कृषि, पशुपालन, गन्ना, सहकारिता और मत्स्य विभाग की विभिन्न योजनाओं तथा उनसे मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी किसानों को बताया गया।

उप कृषि निदेशक राम किशन सिंह ने बताया कि अभियान के अंतर्गत जनपद के सभी विकासखंडों के चयनित 42 गांवों में 27 नवंबर 2026 तक निर्धारित तिथियों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसी क्रम में 28 अक्टूबर को मिलक विकासखंड के ग्राम पजावा और बिलासपुर विकासखंड के ग्राम सिसौना में कार्यक्रम आयोजित होंगे।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए नियमित रूप से मृदा परीक्षण कराएं और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही उर्वरकों एवं कृषि रसायनों का प्रयोग करें। इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी।

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