- पीड़ित की शिकायत पर पुलिस और साइबर सेल सक्रिय, जांच तेज
- ASP का निर्देश— ठगों की पहचान और रिकवरी पर फोकस
- ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों पर प्रशासन सतर्क
- डिजिटल ट्रांजैक्शन में सतर्कता बरतने की अपील
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रायबरेली/गौतमबुद्ध नगर: साइबर अपराधियों द्वारा एक युवक के बैंक खाते से महज कुछ ही मिनटों में 7 लाख 34 हजार 879 रुपये उड़ाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत के बावजूद अब तक न तो राशि वापस हुई है और न ही स्पष्ट कार्रवाई दिख रही है, जिसके चलते पीड़ित न्याय के लिए बैंक और थानों के चक्कर लगाने को मजबूर है।
14 मिनट में साफ हो गए पूरे खाते से 7.34 लाख रुपये
पीड़ित शैलेंद्र तिवारी का कैनरा बैंक में सेविंग अकाउंट है। 17 नवंबर की सुबह 11:08 बजे से 11:22 बजे के बीच खाते से लगातार चार संदिग्ध लेनदेन किए गए। बैंक स्टेटमेंट के अनुसार
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- 11:08 AM — ₹5,02,243.41
- 11:13 AM — ₹1,15,000
- 11:20 AM — ₹50
- 11:22 AM — ₹1,17,586
इन सभी ट्रांज़ैक्शन में भुगतान UPI/BBPS/ICICI/CANARA के नाम पर दिखाया गया है, जबकि पीड़ित के अनुसार उसने कोई लेनदेन नहीं किया।
पीड़ित की शिकायत: “जीवनभर की बचत लुट गई”
तस्वीरों में दर्ज पीड़ित के लिखित आवेदन में उसने बताया है—
“मैंने न तो OTP साझा किया, न कोई अनुमति दी। मेरे खाते से 7.34 लाख रुपये निकाल लिए गए। यह जीवनभर की बचत थी। तत्काल कार्रवाई की जाए।”
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पीड़ित ने साइबर पुलिस पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की है, जिसकी रिसीविंग उसी दिन जारी की गई।
बैंक ने दर्ज की शिकायत, पर राशि अब तक नहीं लौटी
शैलेंद्र ने घटना के तुरंत बाद कैनरा बैंक शाखा में लिखित शिकायत दी। बैंक ने UEBT (Unauthorized Electronic Banking Transaction) प्रक्रिया के तहत केस को स्वीकार करते हुए आवश्यक दस्तावेज जमा करने को कहा।
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बैंक द्वारा जारी दस्तावेज़ों में यह भी दर्ज है कि प्रकरण फ्रॉड की श्रेणी में लिया गया है। बावजूद इसके, पीड़ित द्वारा दस्तावेज जमा करने के बाद भी राशि वापस नहीं की गई है।
थाने में FIR दर्ज, जांच SI को सौंपी गई
पीड़ित के आवेदन के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। NCRB के IIF फॉर्म के अनुसार—
- थाना: (दस्तावेज़ों के अनुसार)
- जांच अधिकारी: SI अनुज कुमार
- प्राथमिकी की कॉपी पीड़ित को उपलब्ध कराई गई
पुलिस ने मामले को “साइबर वित्तीय धोखाधड़ी” की श्रेणी में दर्ज किया है।
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पीड़ित ने लगाए कार्रवाई में ढिलाई के आरोप
पीड़ित का कहना है कि 7.34 लाख रुपये गायब होने जैसी गंभीर वारदात के बाद भी—
- बैंक से स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा
- साइबर पुलिस में केस लंबित है
- स्थानीय थाना जांच में देरी कर रहा है
पीड़ित शैलेंद्र तिवारी का कहना है—
“मेरी सारी जमा पूंजी खत्म हो गई। मैं लगातार बैंक, थाना और साइबर सेल के चक्कर काट रहा हूं। कृपया सरकार और प्रशासन मेरी मदद करे।”
बढ़ते साइबर फ्रॉड पर फिर उठे सवाल
यह मामला उस समय सामने आया है जब देशभर में डिजिटल लेनदेन से जुड़े साइबर फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं।
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चेतावनी के बावजूद लोग और बैंक दोनों सुरक्षा खामियों का शिकार बने हुए हैं।
निष्कर्ष
साइबर अपराधियों ने मिनटों में लाखों रुपये निकाल लिए और शिकायत के बाद भी लंबे समय तक समाधान न मिलने से पीड़ित मानसिक और आर्थिक तनाव झेल रहा है। यह घटना साइबर सुरक्षा व्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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