अब नहीं बिकेगी सेना जैसी वर्दी! भारतीय सेना ने नई कॉम्बैट यूनिफॉर्म पर IPR हासिल किया

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  • भारतीय सेना ने अपनी नई कॉम्बैट यूनिफॉर्म के डिज़ाइन पर हासिल किया IPR अधिकार

नई दिल्ली:भारतीय सेना ने अपनी नई डिजिटल पैटर्न वाली कॉम्बैट यूनिफॉर्म (Combat Uniform) के डिज़ाइन और पैटर्न पर आधिकारिक रूप से बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights – IPR) हासिल कर लिए हैं। इस डिज़ाइन का पंजीकरण पूरा हो चुका है और अब यह पूरी तरह सेना के एकाधिकार (Exclusive Ownership) में सुरक्षित रहेगा।

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इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाज़ार में सेना की वर्दी से मिलते-जुलते कपड़े या नकली यूनिफॉर्म की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

क्या है नई यूनिफॉर्म पर IPR का मतलब?

इस पंजीकरण के बाद—

सेना की यूनिफॉर्म का डिज़ाइन और पैटर्न अब कानूनी रूप से सुरक्षित

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भारतीय सेना के नए डिजिटल डिसरप्टिव पैटर्न को किसी भी प्रकार से कॉपी करना, बेचना, बनाना, प्रिंट करना या व्यावसायिक उपयोग करना अब प्रतिबंधित है।

केवल सेना को ही यह डिज़ाइन बनाने, उपयोग करने और नियंत्रित करने का अधिकार

कोई भी निजी कंपनी, व्यापारी, फर्म, दुकान या व्यक्ति इस यूनिफॉर्म जैसी प्रिंटेड फैब्रिक को बिना अनुमति के नहीं बेच सकेगा।

फर्ज़ी यूनिफॉर्म पहनकर अपराध रोकने में मदद

अक्सर अपराधी सेना की वर्दी जैसी पोशाक पहनकर धोखाधड़ी या अपराध करते हैं—अब यह नियंत्रण में आएगा।

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किस कानून के तहत मिले अधिकार?

कानूनी सुरक्षा इन अधिनियमों के तहत मिलेगी—

  • डिज़ाइन अधिनियम, 2000
  • डिज़ाइन नियम, 2001
  • पेटेंट अधिनियम, 1970

इन कानूनी प्रावधानों के तहत सेना को पूरा अधिकार है कि अगर कोई व्यक्ति/संस्था इस डिज़ाइन का अनधिकृत उपयोग करता पाया गया, तो—

उस पर निषेधाज्ञा (Injunction) लग सकती है भारी क्षतिपूर्ति (Compensation) वसूल की जा सकती है

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आपराधिक/सिविल कार्रवाई भी संभव

क्यों ज़रूरी था IPR पंजीकरण?

  1. बाज़ार में नकली सेना वर्दी की रोक-थाम
  2. सुरक्षा एजेंसियों की पहचान सुरक्षित रखना
  3. कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
  4. राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिम कम करना
  5. कॉम्बैट यूनिफॉर्म को एक मानकीकृत (Standardized) पहचान देना

नई यूनिफॉर्म को जनवरी 2022 में पेश किया गया था, जिसके बाद यह फैसला लिया गया कि डिज़ाइन को कानूनी सुरक्षा दी जाए ताकि किसी भी तरह की नकल रोकना आसान हो।

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आगे क्या?

अब

  • सेना की वर्दी जैसा कपड़ा बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो सकेगी
  • बाजार में सिर्फ अधिकृत सप्लायर ही यूनिफॉर्म बनाएंगे
  • डिजिटल पैटर्न की प्रिंटिंग आम जनता के लिए अवैध मानी जाएगी

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निष्कर्ष

भारतीय सेना का यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा, सैनिकों की पहचान और यूनिफॉर्म की विशिष्टता को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा निर्णय है। भविष्य में सेना की वर्दी जैसी कोई भी पोशाक खुले बाजार में उपलब्ध नहीं होगी, जिससे सुरक्षा में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।vvvhhj

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