रुपया की नहीं सुधर रही सेहत,रिकॉर्ड निचले स्तर पर; सोना-चांदी नई ऊँचाई पर

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  • अमेरिका में H-1B वीजा शुल्क बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में हड़कंप
  • रुपया गिरने से बढ़ रहा भारतीय बाज़ार पर दबाव 

 

नई दिल्ली:-अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मंगलवार को अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुँच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार के दौरान रुपया 52 पैसे टूटकर 88.82 प्रति डॉलर तक गिर गया और अंत में 88.75 के स्तर पर बंद हुआ। यह अब तक का सबसे कमजोर स्तर है।

रुपये की गिरावट के साथ ही निवेशकों ने सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख किया, जिससे सोना और चांदी रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गए।

गिरावट के कारण

विश्लेषकों के अनुसार रुपये में इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजहें हैं—

  • अमेरिका में H-1B वीजा शुल्क में भारी बढ़ोतरी: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा से भारतीय आईटी कंपनियों पर भारी लागत का बोझ बढ़ेगा।
  • अमेरिकी आयात शुल्क (Tariff) नीतियाँ: भारतीय निर्यात पर असर की आशंका से डॉलर की मांग बढ़ी।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली: बड़ी मात्रा में पूंजी निकासी से रुपये पर दबाव आया।
  • वैश्विक अनिश्चितता: निवेशकों का रुख डॉलर, सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश साधनों की ओर रहा।

असर

  • आईटी कंपनियों और सेवा क्षेत्र पर बड़ा दबाव, क्योंकि अमेरिका उनका सबसे बड़ा बाज़ार है।
  • आयात महँगा होने से घरेलू मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा।
  • निर्यातकों को अल्पकालिक राहत, लेकिन आयातकों पर अतिरिक्त बोझ।

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सरकार और RBI की भूमिका

भारत सरकार ने अमेरिकी कदम पर चिंता जताई है और कहा है कि वीजा शुल्क में बढ़ोतरी “मानवीय निहितार्थ” ला सकती है। वहीं, रिज़र्व बैंक रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है।

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