- महंगे रिचार्ज से परेशान उपभोक्ताओं के लिए नई उम्मीद
- ISRO की D2M तकनीक बदल देगी मोबाइल का भविष्य
- Lava ने बनाया देश का पहला D2M फोन, ट्रायल जारी
- ₹2000–₹2500 में फीचर फोन पर मिलेगा फ्री वीडियो
- Saankhya Labs के भारतीय चिप से बढ़ी तकनीकी आत्मनिर्भरता
- कैसे काम करती है D2M तकनीक? समझिए पूरा मॉडल
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नई दिल्ली।
देश में बढ़ते मोबाइल रिचार्ज दरों और डेटा आधारित प्लानों की मजबूरी के बीच आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की उम्मीद पैदा हुई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित D2M (Direct-to-Mobile) तकनीक आने वाले समय में मोबाइल उपयोग का स्वरूप पूरी तरह बदल सकती है। इस तकनीक के जरिए बिना इंटरनेट और बिना डेटा पैक के मोबाइल पर वीडियो, समाचार और मनोरंजन सामग्री सीधे सैटेलाइट से प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी।
महंगे रिचार्ज से परेशान उपभोक्ताओं को उम्मीद
वर्तमान में टेलीकॉम कंपनियों द्वारा बिना डेटा वाले कॉलिंग प्लान लगभग समाप्त कर दिए गए हैं। साधारण फीचर फोन चलाने वाले लाखों उपभोक्ता भी स्मार्टफोन जैसे महंगे पैक लेने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, D2M तकनीक लागू होने पर उपभोक्ताओं को इस मजबूरी से बड़ी राहत मिलेगी।
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Lava ने तैयार किया D2M फोन का प्रोटोटाइप
स्वदेशी मोबाइल निर्माता कंपनी Lava ने D2M सपोर्ट वाला फोन का पहला प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है। सूत्रों के अनुसार, फोन की मैदानी परीक्षण प्रक्रिया जारी है और शुरुआती परिणाम उत्साहजनक हैं।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह तकनीक ₹2000 से ₹2500 की कीमत वाले फीचर फोन में भी उपलब्ध होगी, जिससे ग्रामीण और निम्नआय वर्ग के उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।
भारतीय चिप से बनेगा देश तकनीकी रूप से मजबूत
D2M मोबाइल में Saankhya Labs की विकसित भारतीय चिप का उपयोग किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।
सेमीकंडक्टर तकनीक में आत्मनिर्भरता से देश भविष्य की संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणालियों में अधिक मजबूत और स्वतंत्र होगा।
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कैसे काम करेगी D2M तकनीक?
D2M तकनीक में सैटेलाइट से भेजे गए प्रसारण सिग्नल को मोबाइल फोन सीधे रिसीव करेगा। इसके लिए इंटरनेट की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
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इस तकनीक के माध्यम से
- लाइव न्यूज़
- शैक्षिक सामग्री
- सरकारी सूचनाएं
- मनोरंजन और खेल प्रसारण
टीवी की तरह मोबाइल पर उपलब्ध रहेंगे।
फर्जी खबरों पर लगाम और आपातकालीन सूचनाओं का तेजी से प्रसार
सरकारी एजेंसियों के अनुसार, D2M से सटीक और प्रमाणिक जानकारी सीधे लोगों तक पहुंचेगी, जिससे फर्जी खबरों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त प्राकृतिक आपदा या अन्य आपात स्थितियों में जनता तक अलर्ट तेज़ी से पहुंचाया जा सकेगा।
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टेलीकॉम कंपनियों के लिए बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि D2M तकनीक के व्यापक उपयोग से इंटरनेट डेटा की मांग में कमी आ सकती है।
वीडियो स्ट्रीमिंग और लाइव प्रसारण इंटरनेट की जगह सैटेलाइट से मिलने लगेंगे, जिससे Airtel और Jio जैसी टेलीकॉम कंपनियों के राजस्व मॉडल पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उद्योग इन परिस्थितियों के अनुसार अपने प्लान और सेवाओं में क्या बदलाव करता है।
कब आम लोगों तक पहुंचेगी यह तकनीक?
ISRO, प्रसार भारती और दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) इस प्रोजेक्ट पर मिलकर काम कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक,
D2M तकनीक आधारित मोबाइल 2025–2026 तक बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं।
निष्कर्ष
D2M तकनीक भारत की संचार प्रणाली में एक बड़ा परिवर्तन साबित हो सकती है।
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बिना इंटरनेट के वीडियो और समाचार उपलब्ध होने से करोड़ों उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। दूसरी ओर, यह तकनीक टेलीकॉम उद्योग के मौजूदा ढांचे को चुनौती दे सकती है।
भारत में मोबाइल उपयोग का नया अध्याय शुरू होने की दिशा में एक बड़ा कदम उठ चुका है।
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