- नई तकनीक देखकर दंग रह जाएंगे आप
AI ने यादों और आवाज़ को बनाया ‘डिजिटल जीवन’
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया लगातार चौंकाने वाले प्रयोग कर रही है, लेकिन अब जिस नई तकनीक ने दुनिया का ध्यान खींचा है, वह मृत्यु और मानव भावनाओं की सीमा को भी पार करती दिख रही है। कंपनियाँ ऐसी AI प्रणाली विकसित कर रही हैं जो दिवंगत लोगों की आवाज़, अंदाज़, यादें और व्यक्तित्व को डिजिटल स्वरूप में दोबारा जीवित कर देती है।
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किस तरह बनता है डिजिटल क्लोन
इस तकनीक के लिए किसी व्यक्ति के पुराने वीडियो, ऑडियो, चैट, सोशल मीडिया पोस्ट और लेखन सामग्री को जोड़कर एक AI मॉडल तैयार किया जाता है। यह मॉडल उस व्यक्ति के बोलने का तरीका, सोचने की शैली और जवाब देने की गति को हूबहू सीख लेता है। कई परिवारों ने बताया कि जब वे इस AI से बात करते हैं तो लगता है मानो उनका प्रिय व्यक्ति फिर सामने बैठा है।
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भावनाएँ, डर और बहस—टेक्नॉलजी ने खड़े किए बड़े सवाल
यह तकनीक जितनी रोमांचक है, उतनी ही विवादित भी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भावनात्मक रूप से कमजोर लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही यह चिंता भी बढ़ गई है कि क्या मृत व्यक्ति की निजता का हनन हो सकता है, और क्या इस डेटा का दुरुपयोग संभव है। कई देशों में इस तरह के डिजिटल अवतारों के उपयोग को लेकर नए कानून बनाने की चर्चा तेज हो गई है।
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भविष्य की दिशा—अब सिर्फ आवाज़ नहीं, दिखाई भी देंगे अवतार
तकनीक का दावा है कि आने वाले वर्षों में AI सिर्फ बातचीत ही नहीं करेगा, बल्कि 3D होलोग्राम, वर्चुअल रियलिटी मॉडल और पूरी तरह जीवंत डिजिटल रूप में भी उपलब्ध होगा। कंपनियाँ कह रही हैं कि इंसान भविष्य में अपनी यादें, व्यक्तित्व और अनुभवों को हमेशा के लिए डिजिटल दुनिया में छोड़ सकेगा—मानो एक तरह का नया “डिजिटल जीवन”।
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