- कादरीगेट से आवास विकास और मंडी रोड तक संदिग्ध गतिविधियों की जांच की मांग
- महिलाओं की कथित भूमिका और 50 प्रतिशत हिस्सेदारी के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं, साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जरूरत
फर्रुखाबाद। जिले में सूखे नशे के कथित अवैध कारोबार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप हैं कि चाय की दुकानों, किराना स्टोर और परचून की दुकानों की आड़ में नशीले पदार्थों की बिक्री और सप्लाई की जा सकती है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है।
कादरीगेट की गलियों, आवास विकास, क्रिश्चियन कॉलेज के आसपास, मंडी रोड, सेंट्रल जेल गेट, रकाबगंज और काशीराम कॉलोनी सहित कई इलाकों में कथित गतिविधियों की जांच कराने की मांग उठाई जा रही है। स्थानीय स्तर पर इस कथित नेटवर्क में महिलाओं की भूमिका और 50 प्रतिशत हिस्सेदारी को लेकर भी दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन दावों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल, सप्लाई के स्रोत तक पहुंचने की मांग
सरकार की ओर से नशे के खिलाफ अभियान चलाए जाने के बीच सवाल उठ रहा है कि यदि संबंधित इलाकों में अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो उनकी निगरानी किस स्तर पर की जा रही है। संदिग्ध दुकानों की जांच, नशीले पदार्थों की उपलब्धता के स्रोत का पता लगाने और सप्लाई नेटवर्क की पड़ताल की मांग की जा रही है।
मामले में पुलिस की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, किसी दुकान या व्यक्ति को बिना ठोस प्रमाण संदिग्ध ठहराना उचित नहीं है। जांच एजेंसियों को शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तथ्यों की पुष्टि करते हुए नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
युवाओं को नशे से बचाना बड़ी चुनौती
सूखे नशे की अवैध बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाना युवाओं के भविष्य और समाज की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसके लिए पुलिस की निगरानी के साथ-साथ आम लोगों की जिम्मेदार भागीदारी भी जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री की जानकारी मिलती है, तो उसकी सूचना संबंधित पुलिस थाने या सक्षम अधिकारियों को दी जा सकती है।
आम नागरिकों से अपील है कि वे ऐसी गतिविधियों की जानकारी साझा करते समय केवल सत्यापित तथ्य सामने रखें। बिना प्रमाण किसी व्यक्ति का नाम सार्वजनिक करने या उस पर आरोप लगाने से बचें। नशे के खिलाफ जागरूकता, जिम्मेदार सूचना और निष्पक्ष जांच के जरिए ही इस समस्या पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं।


