सहारनपुर कलक्ट्रेट की मस्जिद पर तड़के चला बुलडोजर, 1911 के बिजली बिल से लेकर सरकारी जमीन तक विवाद

सहारनपुर कलक्ट्रेट की मस्जिद पर तड़के चला बुलडोजर, 1911 के बिजली बिल से लेकर सरकारी जमीन तक विवाद
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सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर स्थित विवादित मस्जिद को शनिवार तड़के करीब पांच बजे प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कलक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक रही। मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए पहले नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने हटाने का आदेश दिया था, जिसे बाद में जिला अदालत ने भी बरकरार रखा।

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रात में सील करने की चर्चा, सुबह जमींदोज मिला ढांचा

मस्जिद को लेकर शुक्रवार रात से ही सहारनपुर में हलचल तेज थी। ध्वस्तीकरण की सूचनाएं फैलने के बाद मौके पर भीड़ जुटने लगी थी। बताया गया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से मस्जिद को सील किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, शनिवार सुबह करीब पांच बजे प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी। सुबह लोगों को मस्जिद का ढांचा पूरी तरह ध्वस्त मिला।

मामला लंबे समय से अदालत में विचाराधीन था। 16 जुलाई 2026 को नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर की जमीन को सरकारी भूमि मानते हुए मस्जिद को अवैध कब्जे के दायरे में माना था। अदालत ने संबंधित पक्षों को परिसर खाली करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश भी सामने आया था।

1911 का बिजली बिल बना विवाद का अहम बिंदु

मामले में सबसे ज्यादा चर्चा मस्जिद पक्ष की ओर से पेश किए गए 1 जनवरी 1911 के बिजली बिल को लेकर हुई। मस्जिद कमेटी का दावा था कि यह दस्तावेज साबित करता है कि कलेक्ट्रेट बनने से पहले ही यहां मस्जिद मौजूद थी। इसके आधार पर मस्जिद पक्ष ने अपने पुराने अस्तित्व का दावा किया।

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वहीं, प्रशासन की ओर से इस दस्तावेज की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए। सरकारी पक्ष ने अदालत में सहारनपुर में बिजली आपूर्ति शुरू होने से संबंधित रिकॉर्ड का हवाला देते हुए 1911 के बिजली बिल को संदिग्ध बताया। कुछ रिपोर्टों में प्रशासन की ओर से सहारनपुर में बिजली आने का वर्ष 1912, जबकि अन्य अदालती रिपोर्टिंग में 1922 और वितरण 1928 बताए जाने का उल्लेख है। इसलिए इस ऐतिहासिक तथ्य को लेकर भी विवाद सामने आया है।

जिला अदालत ने 4 सितंबर को मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद शनिवार सुबह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई। मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है और विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई के समय और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

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