महाकुंभ से पहले 95 करोड़ की सड़क, अब गंदे पानी का दरिया!

Picture of nationstationnews

nationstationnews

 

प्रयागराज में विकास के दावों की खुली पोल, गंगा रिवर फ्रंट रोड पर नाली-सीवर का पानी; जगह-जगह सड़क धंसी, पर्यटकों की बढ़ी मुसीबत

प्रयागराज में महाकुंभ से पहले करीब 95 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई 9 किलोमीटर लंबी गंगा रिवर फ्रंट रोड अब बदहाली की तस्वीर बनती जा रही है। रसूलाबाद घाट से नागवासुकी तक बनाई गई इस सड़क पर इन दिनों विकास नहीं, बल्कि नाली, नाले और सीवर का गंदा पानी बहता नजर आ रहा है।

बताया जा रहा है कि सड़क के करीब 18 से 20 स्थानों पर पानी और गंदगी जमा है। कई जगह सड़क धंसने से इसकी गुणवत्ता और रखरखाव पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस रास्ते को महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुगम और आधुनिक मार्ग के तौर पर तैयार किया गया था, वही अब आने-जाने वालों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है।

NEET के बाद UGC-NET पर भी सवाल, NTA के प्रश्नपत्रों ने खोली व्यवस्था की पोल

मरीन ड्राइव की तर्ज पर सपना, हकीकत में गंदगी

IPS की 95 वर्षीय मां की हत्या, जेवर गायब; लूट के बाद हत्या की आशंका

गंगा किनारे बने इस मार्ग को मुंबई के मरीन ड्राइव की तर्ज पर विकसित करने की योजना थी। मकसद साफ था—श्रद्धालुओं और पर्यटकों को गंगा किनारे से संगम तक सुगम रास्ता मिले और शहर के भीतर यातायात का दबाव भी कम हो।

 

सड़क को बाढ़ और गंगा का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित रखने के लिए बोल्डर क्रेट, इंटरलॉकिंग सतह और मजबूत स्लोप पिचिंग तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई थी।

कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से होगी पुष्प वर्षा, यूपी सरकार ने जारी किया कार्यक्रम; 9-10 अगस्त को इन जिलों में बरसेंगे फूल

लेकिन सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये खर्च करके सड़क को आधुनिक और मजबूत बनाया गया था, तो कुछ ही समय में नाली और सीवर का पानी सड़क पर क्यों बह रहा है?

यूपी पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर वायरल पोस्ट फर्जी, आधिकारिक घोषणा का इंतजार

करोड़ों की सड़क, जिम्मेदारी किसकी?

 

रोज हजारों पर्यटक और श्रद्धालु इस रास्ते से संगम की ओर जाते हैं। ऐसे में सड़क पर जमा गंदा पानी न सिर्फ शहर की छवि खराब कर रहा है, बल्कि राहगीरों की सुरक्षा और सुविधा पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

 

महाकुंभ के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर जिस सड़क को प्रयागराज के विकास का मॉडल बताया गया था, उसकी मौजूदा हालत अब सिस्टम की निगरानी और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

 

  • 95 करोड़ की सड़क पर गंदा पानी आखिर किसकी नाकामी है?
  • नाला-सीवर का पानी सड़क पर पहुंचने से पहले जिम्मेदार विभागों की नजर क्यों नहीं पड़ी?
  • और सबसे बड़ा सवाल—करोड़ों खर्च होने के बाद भी जनता को साफ-सुथरी और सुरक्षित सड़क कब मिलेगी?

 

विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच गंगा रिवर फ्रंट की यह तस्वीर एक सवाल छोड़ रही है—क्या करोड़ों की योजनाओं का हिसाब सिर्फ उद्घाटन तक ही सीमित है?

[wps_visitor_counter]