बस स्टैंड बना ‘मनमानी का अड्डा’! दो अलग-अलग तारीखों में बंद मिला कार्यालय, कर्मचारी पर ड्यूटी छोड़कर सोने और गैरहाजिर रहने के आरोप

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  • 22 जुलाई को कार्यालय के अंदर सोते मिले कर्मचारी
  •  24 जुलाई को कार्यालय ही नहीं खोला
  • वीडियो सामने आने के बाद एआरएम ने मांगी रिपोर्ट, कार्रवाई के दिए निर्देश

न्यूज डेस्क 

शाहजहांपुर/कटरा। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के शाहजहांपुर डिपो के अंतर्गत आने वाले कटरा बस स्टैंड से परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां तैनात आउटसोर्स कर्मचारी ललित गुप्ता अपनी ड्यूटी के दौरान मनमानी करते हैं। दो अलग-अलग तारीखों पर किए गए निरीक्षण में कार्यालय की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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मामले से जुड़े वीडियो और कर्मचारियों के बयानों के आधार पर आरोप लगाया गया है कि निर्धारित ड्यूटी समय के बावजूद कभी कार्यालय बंद मिलता है तो कभी कर्मचारी कार्यालय के भीतर सोते हुए पाए जाते हैं। इन घटनाओं का वीडियो भी संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है।

पहला निरीक्षण: 22 जुलाई को कार्यालय अंदर से बंद, कर्मचारी गहरी नींद में मिलने का दावा

बताया गया कि 22 जुलाई 2026 को सुबह ड्यूटी के दौरान कटरा बस स्टैंड का पूछताछ कक्ष अंदर से बंद था। आरोप है कि खिड़की से देखने पर कर्मचारी ललित गुप्ता कार्यालय के भीतर गहरी नींद में सोते हुए दिखाई दिए। आवाज देने के बावजूद दरवाजा नहीं खुला।

इसी दौरान  कई वाहन  के परिचालक रजिस्टर में बस की एंट्री कराने पहुंचे थे, लेकिन कार्यालय बंद होने के कारण एंट्री नहीं हो सकी।

परिचालक का बयान

“मैं अपनी वाहन संख्या UP 27 BT —-(क्रू  सुरक्षा के दृष्टि से)की एंट्री कटरा बस स्टेशन पर कराने गया था, लेकिन पूछताछ कक्ष का दरवाजा अंदर से बंद था। झांककर देखा तो ललित गुप्ता जी गहरी नींद में सो रहे थे। हमने आवाज भी लगाई लेकिन वे नहीं उठे। इसलिए हमारी गाड़ी रजिस्टर में दर्ज नहीं हो सकी। यदि हम एंट्री कराए बिना चौराहे से सवारी उठा लेते तो ₹100 की कटौती हम पर ही कर दी जाती।”

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इस बयान ने व्यवस्था में दोहरे मापदंड के आरोपों को भी जन्म दिया है।

दूसरा निरीक्षण: 24 जुलाई को कार्यालय ही नहीं खोला गया

आरोपों के अनुसार 24 जुलाई 2026 को स्थिति और भी गंभीर रही। निर्धारित ड्यूटी समय के बावजूद कर्मचारी ने कार्यालय ही नहीं खोला। यात्रियों और परिवहन कर्मियों को पूछताछ एवं रजिस्टर संबंधी कार्यों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।

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स्थानीय कर्मचारियों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनका कहना है कि संबंधित कर्मचारी अक्सर मोबाइल फोन पर व्यस्त रहते हैं और अपने संगठनात्मक कार्यों के नाम पर कार्यालय बंद कर चले जाते हैं।

स्थानीय राजनीति और नियुक्ति पर भी उठे सवाल

कर्मचारियों का आरोप है कि कटरा बस स्टैंड पर अतिरिक्त कर्मचारी की आवश्यकता नहीं थी, इसके बावजूद स्थानीय प्रभाव के चलते नियुक्ति की गई। यह भी आरोप लगाया गया कि इससे पहले संबंधित कर्मचारी के भाई सुमित गुप्ता यहां कार्यरत थे और उन पर बाहरी डिपो की बसों की कथित फर्जी जांच करने के आरोप लगे थे। बाद में उन्हें हटाए जाने के बाद ललित गुप्ता की तैनाती की गई।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता’—कर्मचारियों का दावा

कुछ कर्मचारियों का दावा है कि ललित गुप्ता स्वयं को एक रक्षा संगठन का पदाधिकारी बताते हुए कहते हैं कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता और न ही उनका स्थानांतरण करा सकता है। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

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वीडियो पहुंचा अधिकारियों तक, आरएम ने मांगी रिपोर्ट

मामले का वीडियो एआरएम शाहजहांपुर डिपो को भेजा गया है। इस संबंध में क्षेत्रीय प्रबंधक गौरव वर्मा ने कहा—

चूँकि मामला शाहजहांपुर डिपो के कटरा बस स्टैंड का है, इस बाबत वीडियो एआरएम शाहजहांपुर डिपो को प्रेषित कर एक सप्ताह के भीतर आख्या रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

क्षेत्रीय प्रबंधक, गौरव वर्मा

अब निगाहें कार्रवाई पर

लगातार दो अलग-अलग तारीखों पर सामने आई कथित लापरवाही ने परिवहन निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक कर्मचारी की लापरवाही नहीं, बल्कि यात्रियों की सुविधा और विभागीय अनुशासन दोनों पर गंभीर चोट मानी जाएगी। अब देखना होगा कि विभाग जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है और क्या कटरा बस स्टैंड की कार्यप्रणाली में सुधार दिखाई देता है।

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