शाहजहांपुर रोडवेज डिपो में 4 हजार रुपये की रिश्वत लेते प्रधान लिपिक गिरफ्तार

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  • ड्यूटी लगाने के नाम पर चालकों-परिचालकों से रिश्वत मांगने का आरोप, बरेली की एंटी करप्शन टीम ने की कार्रवाई
  • गिरफ्तारी के बाद डिपो की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, अन्य शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग

शाहजहांपुर। रोडवेज डिपो में कथित रिश्वतखोरी के मामले में बरेली से आई एंटी करप्शन टीम ने प्रधान लिपिक नृपेश को चार हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया। प्रधान लिपिक पर चालकों और परिचालकों की ड्यूटी लगाने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप है। कार्रवाई के बाद रोडवेज बस स्टेशन पर हलचल मच गई। गिरफ्तार कर्मचारी को सदर बाजार थाने ले जाए जाने की जानकारी सामने आई है, जहां मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।

शिकायत के आधार पर एंटी करप्शन टीम ने की कार्रवाई

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एंटी करप्शन टीम को प्रधान लिपिक के खिलाफ ड्यूटी आवंटित करने के नाम पर रिश्वत मांगने की शिकायत मिली थी। शिकायत के आधार पर टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद टीम ने रोडवेज बस स्टेशन पहुंचकर कथित तौर पर चार हजार रुपये लेते समय प्रधान लिपिक को पकड़ लिया।

कार्रवाई के बाद डिपो में कर्मचारियों के बीच चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, मामले में शिकायतकर्ता का विस्तृत पक्ष, गिरफ्तारी से संबंधित आधिकारिक बयान और आगे की कानूनी कार्रवाई का विवरण उपलब्ध होने पर घटना के सभी पहलुओं की अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

ड्यूटी आवंटन की पारदर्शिता पर उठे सवाल

प्रधान लिपिक की गिरफ्तारी के बाद डिपो में ड्यूटी आवंटन की व्यवस्था और उसकी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि जांच में ड्यूटी लगाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप साबित होता है, तो यह विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़ा गंभीर मामला होगा। ऐसे में ड्यूटी चार्ट, आवंटन प्रक्रिया और संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है।

इसी बीच, डिपो की कार्यशाला, ईटीआईएम पटल और कैश कक्ष से संबंधित कथित अनियमितताओं तथा कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर भी जांच की मांग उठाई जा रही है। हालांकि, इन अतिरिक्त आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संबंधित अभिलेखों, उपस्थिति पंजिकाओं और विभागीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मामले में रोडवेज विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा। यदि अन्य अनियमितताओं के संबंध में लिखित शिकायतें या साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो उनकी नियमानुसार जांच की जानी चाहिए।

फिलहाल, प्रधान लिपिक की गिरफ्तारी रिश्वत के आरोप से संबंधित कार्रवाई है। आरोपी को दोषी ठहराने का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा। अब आगे की कानूनी कार्रवाई और विभागीय जांच पर नजर रहेगी।

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