- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम में हुए शामिल, शिकायतों के समयबद्ध निपटारे पर दिया जोर
- ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भवनों की मरम्मत और साफ-सफाई 31 मार्च 2027 से पहले पूरी करने का निर्देश
पटना, 14 अक्टूबर। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बुधवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम हॉल में आयोजित राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान कुल 101 आवेदक उपस्थित हुए और उनके मामलों का निष्पादन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आम जनता की शिकायतों के निष्पक्ष एवं समयबद्ध समाधान को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिए।
जनशिकायतों के निपटारे में संवेदनशीलता बरतें अधिकारी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं को सुनना, उनका उचित समाधान करना और शिकायतकर्ताओं को संतुष्ट करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आम लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए तथा उनके निराकरण में संवेदनशीलता और तत्परता बरती जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। प्रशासनिक स्तर पर शिकायतों का उचित निपटारा सुनिश्चित करते हुए जनहित से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को ‘सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सरकारी भवनों की मरम्मत, रख-रखाव और साफ-सफाई का कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों, विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य संस्थानों और अन्य सरकारी भवनों की स्थिति में सुधार किया जाए।
इसके साथ ही ऐसे टोलों की सड़कों की मरम्मत एवं रख-रखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा गया, जहां आवश्यक कार्य अभी शेष हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इन सभी कार्यों को 31 मार्च 2027 से पहले अनिवार्य रूप से पूरा कराया जाए।
सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सुविधाओं की स्थिति बेहतर बनाना और आम नागरिकों को बुनियादी सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराना है। राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम के माध्यम से जनशिकायतों के समाधान के साथ-साथ विकास कार्यों की समयबद्ध पूर्ति पर भी जोर दिया गया।


